इंद्र

विक्षनरी से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

इंद्र ^१ वि॰ [सं॰]

१. एश्वर्यावान् । विभूतिसंपन्न ।

२. श्रेष्ठ । बड़ा । यौ॰.—देवेंद्र । नरेंद्र । यादवेंद्र । योगींद्र । दानवेंद्र । सुरेंद्र ।

इंद्र ^२ संज्ञा पुं॰

१. एक सर्वप्रमुख वैदिक देवता जिसका स्थान अंतरिक्ष है जो और पानी बरसाता है । यह देवताओं का राजा माना गया है । शौर्य, युद्ध और वैभव का वह सर्वश्रेष्ठ वैदिक देव है । ऋग्वेद में सबसे अधिक सूक्यों द्वारा इंद्र के शौर्य, वीर्य, पराक्रम और सोमपान आदि का वर्णन किया गया है । ऋग्वेदयुगीन वैदिक यज्ञों में भी उसका इत्पंत प्रमुख स्थान है । विशेष—इसका वाहन ऐरावत और अस्त्र वज्र है । इसकी स्त्री का नाम शचि और सभा का नाम सुधर्मा है, जिसमें देव, गंधर्व और अप्सराएँ रहती हैं । इसकी नगरी अमरावती और वन नंदन है । उच्चैःश्रवा इसका घोड़ा और मातलि सारथी है । वृत्र, त्वष्टा, नमुचि, शंवर, पण, वलि और विरोचन इसके शत्रु हैं । जयंत इसका पुत्र है । यह ज्येष्ठा नक्षत्र और पूर्व दिशा का स्वामी है । पुराण के अनुसार एक मन्वंतर में क्रमशः चौदह इंद्र भोग करते हैं जिनके नाम ये है—इंद्र । विश्वभुक् । विपश्चित् । विभु । प्रभु । शिखि । मनोजव । तेजस्वी । बलि । अदभुत । त्रिदिव । सुशांति । सुकीर्ति । ऋत धाता । दिवस्पति । वर्तमान काल में तेजस्वी इंद्र कर रहे हैं । पर्या॰—मरुत्वान् । मघवा । बिडौजा । पाकशासन । वृद्धश्रवा । शुनासीर । पुरहूत पुरंदर । विष्णु । लेखर्षभ । शक्र । शतमन्यु । दिवस्पति । सुत्रामा । गोत्रभिद् । वज्री । वासव । वृत्रहा । वृषा । वास्तोष्पति । सुरपति । बलाराति । शचीपति । जभभेदी । रहिहय । स्वराट् । नमुचिसूदन । सक्रंदन । दुश्च्यवन । राषाह । मेघवाहन । आखंडल । सहस्त्राक्ष । ऋभुक्ष । महेंद्र । कौशिक । पूतव्रतु । विश्वंभर । हरि । पुरर्दशा । शतधृति । पृतनाषाड् । अहिद्विष । वज्रपाणि । देवराज । पर्वतारि । पर्यप्य । देवाधिप । नाकनाथ । पूर्वदिक- पति । पुलोमारि । अर्ह प्राचीन । बहि । तपस्तक्ष । यो.—इंद्र का अखड़ा = (१) इंद्र की समा जिसमें अप्सराएँ नाचती हैं । (२) बहुत सजी हुई सभा जिसमें खूब नाच रंग होता हो । इंद्र की परी = (१) अप्सरा । (२) बहुत सुंदरी स्त्री । इंद्रसभा=इंद्र का अखाड़ा । उ॰—इंद्रसभा जनु परिगै डीठी ।—जायसी ग्रं॰, पृ॰ १८ ।

२. बारह आदित्यों में से एक । सूर्य ।

३. बिजली ।

४. राजा । मालिक । स्वामी ।

५. ज्येष्ठा नक्षत्र ।

६. चौदह की संख्या ।

७. ज्योतिष में विष्कु भादिक २७ योगों में से २६वाँ ।

८. कुटज वृक्ष ।

९. रात ।

१०. छप्पय छंद के भेदों सें से एक ।

११. दाहिनी आँख की पुतली ।

१२. व्याकरण आदि के आचार्य का नाम ।

१३. जीव । प्राण ।

१४. श्रेष्ठ या प्रधान व्यक्ति [को॰] ।

१५. मेघ । बादल (को॰) ।

१६. भारतवर्ष का एक भाग (को॰) ।

१७. परमेश्वर (को॰) ।

१८. वनस्पतिजन्य एक प्रकार का जहर [को॰] ।