इंद्रजव

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

इंद्रजव संज्ञा पुं॰ [सं॰ इन्द्रयव] कुड़ा । कौरैया का वृक्ष । विशेष—ये बीज लंबे—लंबे जव के आकार के होते हैं और दवा के काम में आते हैं । एक एक सींके में हाथ हाथ भर की लंबी दो दो फलियाँ लगती हैं, जिनके दोनों छोर आपस में जुड़े रहते हैं । फलियों के अंदर रुई या घूवा होता है जिसमें बीज रहते हैं । इसके पेड़ में काँटे भी होते हैं । यह मलरोधक, पाचक और गरम है तथा संग्रहणी और खूनी बवासीर में फायदा करता है । त्वचा के रोगों पर भी यह चलता है ।