इंद्रायन

विक्षनरी से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

इंद्रायन संज्ञा पुं॰ [सं॰ इन्द्राणी] एक लता जो बिलकुल तरबूज की लता की तरह होती है । इनारू । उ॰—इंद्रायन दाड़िम विषम जहाँ न नेकु विवेक ।—भारतेंदु ग्रं॰, भा॰ २, पृ॰ ६६६ । विशेष—सिंध, डेरा इस्माईलखाँ, सुलतान, बहावलपुर तथा दक्षिण और मध्य भारत में यह आपसे आप उपजती है । इसका फल नारंगी के बराबर होता है जिसमें खरबूजे की तरह फाँके कटी होती हैं । पकने पर इसका रंग पीला हो जाता है । लाल रंग का भी इंद्रायन होता है । यह फल विषैला और रेचक होता है । अँगरेजी और हिंदुस्तानी दोनों दवाओं में इसका सत काम आता है । यह फल देखने में बड़ा सुंदर पर अपने कड़ुए- पन के लिये प्रसिद्ध है । मुहा॰—इंद्रायन का फल = देखने में अच्छा पर वास्तव में बुरा । सूरतहराम । खोटा ।