ईन्धन

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ईंधन संज्ञा पुं॰ [ सं॰ इन्धन]

१. जलाने की लड़की, कोयला, कंड़ा आदी । जलावन । जरवनी । उ॰— विधन ईंधन पाइए सायर जुरे न नीर । परे उपास कुबेर घर जो बिपच्छ रघुवीर ।— तुलसी (शब्द॰) ।

२. किसी यंत्र को गतिशोल करने के लिये उसमें दी जानेवाली सामग्री या पदार्थ, जैसे- तेल, पेट़्रोल, कोयला आदि ।

३. ऐसी बात जो क्रुद्ध व्याक्ति को और अधिक उत्ते जित करने में सहायक हो ।