उँगलियाँ

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

उँगलियाँ नचाना दे॰ 'उँगलियाँ चमकाना' । उँगलियाँ फोड़ना = दे॰ 'उँगलियाँ चटकाना' । (पाँचों) उँगलियाँ बराबर नहीं होतीं = एक जाति की सब वस्तुएँ समान मुणवाली नहीं होतीं । (सीधी) उँगलियाँ घी न निकलना = सिधाई के साथ काम न निकलना । भलमंसाहत से कार्य सिद्ध न होना । उँगलियों पर दिन गिनना = उत्सुकता से किसी (दिन) की प्रतीक्षा करना । उ॰—दिन फिरेंगे या फिरेंगे ही नहीं । ऊब दिन हैं उँगलियों पर गिन रहे । ।—चुभते॰, पृ॰ ३ । उँगलियों पर नचाना = जिस दशा में चाहे, उस दशा में करना, अपनी इच्छा के अनुसार ले चलना । अपने वश में रखना । तंग करना । जैसे—अजी तुम्हारे ऐसों को तो मैं उँगलियों पर नचाता हूँ । (किसी पर या किसी की ओर) उँगली उठाना = (किसी का) लोगों की निदा का लक्ष्य होना । निंदा होना । बदनामी होना । (किसी पर या किसी की ओर) उँगली उठाना = (१) निंदा का लक्ष्य बनाना । लांछित करना । दोषी बताना । उ॰— चाहे काम किसी का हो पर लोग उँगली तुम्हारी ही ओर उठाते हैं । (२) तनिक भी हानि पहुँचाना । टेढ़ी नजर से देखना । उ॰—मजाल है कि हमारे रहते तुम्हारी ओर कोई उँगली उठा सके । उँगली करना=हैरान करना । सताना । दम न लेने देना । आराम न करने देना । उ॰—जितना काम करो उतना ही वे और उँगली किए जाते हैं । उँगली चटकाना =(१) उँगलियों को इस प्रकार खींचना । या दबाना कि उनसे चट चट शब्द निकले । (२) शाप देना । (स्त्री॰) । विशेष—जब स्त्रियाँ किसी पर बहुत कुपित होती हैं तब उलटे पंजों को मिलाकर उंगलियाँ चटकाती हैं और इस प्रकार के शाप देती हैं—'तेरे बेटे मरें, भाई मरें' इत्यादि ।