उछाह

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

उछाह संज्ञा पुं॰ [सं॰ उत्साह प्रा॰ उत्साह] [वि॰ उछाही]

१. उत्साह । उमंग । हर्ष । प्रसन्नता । आनंद । उ॰ (क) छढ़हि कुँवर मन करहि उछाहू । आगे घाल जिनै नहिं काहू । ।—जायसी (शब्द॰) । (ख) और सबै हरखी हँसति गावति भरी उछाह । तुम्ही बहू बिलखी फेरै क्यों देवर कै ब्याह ।—बिहारी र॰ ६०२ । (ग) नाह के ब्याह कि चाह सुनी हिय माहिं उछाह छबीली के छायो । पौढ़ि रही पट ओढ़ि अटा दुख को मिस कै सुख बाल छिपायो ।—मतिराम (शब्द॰) ।

२. उत्सव । आनंद की धू्म ।

३. जैन लोगों की रथयात्रा । उत्कंठा । इच्छा । उ॰—लंकादाहु देखे न उछाह रह्यो काहुन को कहैं सब सचिव पुकारे पाँव रोपिहैं ।—तुलसी ग्रं॰ पृ॰ १८० ।