उतारा

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

उतारा ^२ संज्ञा पुं॰ [हि॰ उतरना]

१. प्रेतबाधा या रोग की शांति के लिये किसी व्यक्ति के शरीर के चारों ओर खाने पीने ओदि की कुछ सामग्री की घुमाकार चौरहे या और किसी स्थान पर रखना । उ॰—कहुँ रूसत रोवत नहिं सोवत रगवाये न रगाहीँ, घी के तुला कराबहीं जननी विविध उतार कराहीँ ।—रघुराज (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰— उतारना । —करना ।

२. उतारे कि सामग्री या वस्तु ।