उलटी

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

उलटी ^१ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ उलटना]

१. वमन । कै ।

२. मालखंभ की एक कसरत जिसमें खिलाड़ी की पीठ मालखंभ की ओर और सामना देखनेवालों की ओर रहता है । खिलाड़ी दोनों पैरों को पीछे फेंककर मालखंभ में लिपटता है और ऊपर चढ़ता उतरता है । कलैया ।

उलटी ^२ वि॰ स्त्री॰ [हिं॰ उलटा का स्त्री॰ रूप]

१. विपरीत । विरुद्ध ।

उलटी ^३ क्रि॰ वि॰ [हिं॰] दे॰ 'उलटा' । उ॰—सने की गाँठ भिगाने से उलटी कड़ी होती है ।—भारतेंदु ग्रं॰, भा॰१, पृ॰ ३७९ ।

उलटी काँगसी संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ उलटी+ देश॰ काँगसी] मालखंभ की एक कसरत जिसमें पंजा उलटकर उँगलियाँ फँसाई जाती हैं ।

उलटी खड़ी संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ उलटी+ खड़ी] मालखंभ की एक कसरत जिसमें खड़े होकर दोनों पैरों को आगे से सिर पर उड़ाते हुए पीठ ले जाते है और फिर उसी जगह पर लाते हैं जहाँ सै पैर उड़ाते हैं ।

उलटी चीन संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ उलटा+ चेन=चुनना] नैचा बाँधने का एक भेद जिसमें कपड़े की मुड़ी हुई पट्टी नर पर लपेटते हैं ।

उलटी बगला संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ उलटी+बगली] मुगदल की एक कसरत जो बल अंदाजने के लिये की जाती है । इसमें पीठ पर से छाती पर मुगदल आता है तो भी मुट्ठी ऊपर ही रहती है ।

उलटी रुमाली संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ उलटी+ फा॰ रुमाल] मुगदल भाँजने का एक भेद । विशेष—यह प्रकार की रुमाली है, भेद केवल यह है कि इसमें मुगदलों की झोंक आगे की होती है । रुमाली के समान इसमें भी मुगदल की मुठिया उलटी पकड़नी चाहिए ।

उलटी सरसों संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ उलटी+ सरसों] वह सरसों जिसकी फलियों का मुँह नीचे होता है । यह जादू टोना, मंत्र तंत्र के काम आती है । टेरो ।

उलटी सवाई संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ उलटी+ सवाई] वह जंजीर जिससे जहाज की अनी या नोक के नीचे सबदरा बँधा रहता है ।