ऊपर

विक्षनरी से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ऊपर क्रि॰ वि॰ [सं॰ उपरि] [वि॰ ऊपरी]

१. ऊँचे स्थान में । ऊँचाई पर आकाश की ओर । जैसे,—तसवीर बहुत ऊपर है, नहीं पहुँचोगे । आधार पर । सहारे पर । जैसे,—(क) पुस्तक मेज के ऊपर है । (ख) मेरे ऊपर कृपा कीजिए ।

३. ऊँची श्रेणी में । उच्च कोटि में । जैसे,—इनके ऊपर कई कर्मचारी हैं ।

४. (लेख मे) पहले । जैसे,—ऊपर लिखा जा चुका है । कि... ।

५. अधिक । ज्यादा । जैसे;—हमें यहाँ आए दो घंटे से ऊपर हुए ।

६. प्रकट में । देखने में । जाहिरी तौर पर । प्रत्यक्ष में । बाहर में । उ॰—ऊपर हित अंतर कुटिलाई ।—विश्राम (शब्द॰) ।

७. तट पर । किनारे पर । जैसे,—ताल के ऊपर, गाँव से थोड़ा हटकर, एक बड़ा भारी बड़ का पेड़ है ।

८. अतिरिक्त । परे । प्रतिकूल । उ॰—वर्णाक्षम कर मान यदि, तब लगि श्रुति कर दास । वर्णाश्रम ते त्यक्त जे श्रुति ऊपर तेहि वास । —(शब्द॰) । मुहा॰—ऊपर ऊपर=बाला बाला । अलग अलग । निराले निराले । बिना और किसी को जताए । चुपके से । जैसे,— तुम ऊपर ऊपर रुपया फटकार लेते हो, हमें कुछ नहीं देते । ऊपर ऊपर जाना = लक्ष्य से बाहर जाना । निष्फल होना । व्यर्थ जाना । कुछ प्रभाव न उत्पन्न करना । जैसे,—मैं लाख कहूँ, मेरा कहना तो सब ऊपर ऊपर जाता है । ऊपर का दम भरना = ऊँची साँस चलना । उखडी साँस चलना । ऊपर की आमदनी =(१) वह प्राप्ति जो नियत या निश्चित से अधिक हो । बँधी तनख्वाह वा आमदनी के सिवाय मिली हुई रकम । (२ऊपर की दोनों जाना = दोनों आँखें फूटना । उ॰—ऊपर की दोनों गईं हिय की गईं हेराय । कह कबीर चारिहुँ गईं तासों कहा बसाय । —कबीर (शब्द॰) । ऊपर छार पड़ना = मर जाना । उ॰—जौ लहि ऊपर छार न परे, तौ लहि यह तृष्णा नहीं मरे ।—जायसी (शब्द॰) । ऊपर टूट पड़ना=धावा करना । आक्रमण करना । ऊपर तले =(१) ऊपर नीचे (२) एक के पीछे एक । आगे पीछे । लगातार । क्रमशः । ऊपर तले के =आगे पीछे के भाई वा बहनें । वे दो भाई वा बहनें जिनके बीच में और कोई भाई या बहन न हुई हो । पू॰ तरउपरिया (स्त्रियों का विश्वास है कि ऐसे लड़कों में बराबर खटपट रहा करती है ।) ऊपर लेना =जिम्मे लेना । हाथ में लेना । (किसी कार्य का) भार लेना । जैसे,—तुम यह काम अपने ऊपर लोगे । ऊपरवाला=(१) ईश्वर । (२) अफसर । ऊँचे दरजे का । (३) भृत्य । सेवक । नौकर । चाकर । काम करनेवाला । (४) अपरिचित । बिना जाना बूझा आदमी । बाहरी आदमी । ऊपर से—(१२) इसके अतिरिक्त । सिवा इसके । (३) वेतन से अधिक । घूस । रिश्वत । ऊपर की आय । भेंट । नज्र । असाधारण आय । (४) प्रत्यक्ष में दिखाने के लिये । जाहिरी तौर पर । जैसे,—वह मन में कुछ और रखता है और ऊपर से मीठी मीठी बातें करता है । ऊपर से चला जाना= कचर के चले जाना । रौंदने हुए जाना । ऊपर ही से उसासें लेना=दिखावटी रंज या दुःख करना । उ॰—जो न जानें ऊपर ही से उसके लिये उसाँसें लिया करते हैं ।—प्रंमघन॰, भा २, पृ॰ ५५ । ऊपर होना=(१) बढ़ जाना । आगे निकल जाना । (२) बढ़कर होना । श्रेष्ठ होना । (३) प्रधान होना । जैसे,—(क) उन्हीं की बात सबके ऊपर है । (ख) भाग्य ही सबके ऊपर है ।