ऊर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ऊर ^१ संज्ञा पुं॰ [देश॰] पंजाब में धान बोने की एक रीति । जड़हन रोपना । विशेष—बेहन के पौधे जब एक महीने के हो जाते हैं तब उन्हें पानी से भरे हुए खेत में दूर दूर पर बैठाते हैं ।

ऊर ^२ पु वि॰ [हिं॰ और] दे॰ 'और' । उ॰—गरब करि ऊभो छइ सामरयो राव, मो सरीखा नहीं ऊर भुवाल ।—बी॰ रासो, पृ॰ ३२ ।

ऊर ^३ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ और] ओर । अंत ।