ऊरु

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ऊरु संज्ञा पुं॰ [सं॰] जानु । जंघा । रान । उ॰—रोक सकता हूँ ऊरूओं के बल से ही उसे, टूटे भी लगाम यदि मेरी कभी भूले से । —साकेत, पृ॰ ७३ ।