ऐपन

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ऐपन संज्ञा पुं॰ [सं॰ लेपन अथवा देशी आइप्पण=चावल का दूध । गृह का भूषण] एक मांगलिक द्रव्य । यह चावल और हल्दी को एक साथ गीला पीसने से बनता है । देवताऔं की पूजा में इससे छापा लगाते हैं और घडे़ पर चिहन करते हैं । उ॰— (क) अपनो ऐपन निज हथा तिय पूजहि नित भीति । फलै सकल मनकामना तुलसी प्रीति प्रतीति ।—तुलसी ग्रं॰, पृ॰ १४१ ।(घ) केतिक सोने की डींडि केसर सों मारी मींडि ऐपन की पींडि जोति चंपाऊ लजायो है ।—गंग॰, पृ॰ २३ ।