ओटना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ओटना क्रि॰ स॰ [सं॰ आवर्तन, पा॰ आवट्टन, प्रा॰ आउट्टण]

१. कपास को चरखी में दबाकर रुई और बिनौलों को अलग अलग करना । उ॰—यहि विधि कहौं कहा नहिं माना । मारग माहि पसारिनि ताना । रात दिवस मिलि जोरिन ताना । ओटत कातत भरम न भागा ।—कबीर (शब्द॰) ।

२. बार बार कहना । अपनी ही बात कहते जाना । जैसे, —तुम तो अपनी ही ओटते दूसरे की सुनते ही नहीं ।

३. रोकना । आड़ना । अपने ऊपर सहना । उ॰—(क) दास को जो डारी चोट ओट लई अंग में ही नहीं मैं तो जाहुँ विजय मूरति बताई है । —प्रिया॰ (शब्द॰) । (ख) मुरि मुसुकाइ जो पिछौंहैं चोट ओटी है ।—रत्नाकर, भा॰२, पृ॰ २०९ ।

४. अपने जिम्मे लेना । अपने ऊपर लेना ।