ओपना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ओपना ^१ क्रि॰ स॰ [सं॰ आवपन = सब बाल मुड़ाना, हिं॰ ओप] माँजना । साफ करना । जिला देना । चमकाना । पालिश करना । उ॰—(क) केशवदास कुंदन के कोश ते प्रकाशमान, चिंतामणि ओपनी सों औपि कै उतारि सी ।—(केशव शब्द॰) । (ख) जुरि न मुरे संग्राम लोक की लीक न लोपी । दान, सत्य, सम्मान सुयश दिशि विदिशा ओपी ।—राम चं, पृ॰ ३ ।

ओपना ^२ क्रि॰ अ॰

१. झलकना । चमकना । उ॰—जिती हुती हरि के अवगुन की ते सबही तोपी । सूरदास प्रभु प्रेम हेम ज्यौं, अधिक ओप ओपी ।—सूर (शब्द॰) ।