ओलना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ओलना ^१ क्रि॰ स॰ [हिं॰ ओल=आड़]

१. परदा करना । ओट में देना । उ॰—लोल अमोल कटाक्ष कलोल अलोकिक सों पट ओलि कै फेरे ।—केशव ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ ७३ ।

२. आड़ना । रोकना ।

३. ऊपर लेना । सहना । उ॰—केसोदास कौन बड़ी रूप कुलकानि पै अनोखो एक तेरे ही अनूप उर औलियै ।— केशव ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ ७९ ।

ओलना ^२ क्रि॰ सं॰ [सं॰ शूल; हिं॰ हूल] घुमाना । चुभाना । उ॰—ऐसी ह्वै है ईस पुनि आपने कटाछ मृगमद घनसार सम मेरे उर ओलिहै । —केशव ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ ४९ ।