औचट

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

औचट ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ अवोच्चाट, हिं॰ उचटना = हटना] ऐसी स्थिति जिसमें निस्तार का उपाय जल्दी न सूझे । अंड़स । संकट । कठिनता । साँकरा । उ॰—रसखान सों केतों उचाटि रही, उचटी न सकोच की औचट सों । अलि कोटि कियो अटकी न रही, अटकी अँखियाँ लटकी लट सों ।— रसखान (शब्द॰) । मुहा॰—औचट में पड़ना = संकट में पड़ना । जैसे,—साँप जब औचट में पड़ता है तभी काटता है ।

औचट ^२ क्रि॰ वि॰

१. अचानक । अकस्मात् । उ॰—इक दिन सब करती रहीं जमुना में अस्नान । चीर हरे तहँ आइकै औचट स्याम सुजान ।—विश्राम (शब्द॰) ।

२. अनचीते में । भूल से । उ॰—स्वारथ के साथी तज्यो, तिजरा को सो टोटको औचट उलटि न हेरो ।—तुलसी (शब्द॰) ।