कंकुष्ठ

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

कंकुष्ठ संज्ञा पुं॰ [सं॰ कङ्कष्ठ] एक प्रकार की पहाड़ी मिट्टी । विशेष—भावप्रकाश के अनुसार यह हिमालय के शिखर पर उत्पन्न होती है । कहते हैं, यह सफेद और पीली दो प्रकार की होती है । सफेद को नालिक और पीली को रेणुक कहते हैं । रेणुक ही अधिक गुणवाली समझी जाती है । वैद्यक के अनुसार यह गुरु, स्निग्ध, विरेचक, तिक्त, कटु, उष्ण, वर्णकारक और कृमि, शोथ, गुल्म तथा कफ की नाशक होती है । पर्या॰—कालकुष्ठ । विरंग । रंगदायक । रेचक । पुलक । शोधक । कालपालक ।