कंचुरि

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

कंचुरि पु संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ कञ्चुली] केंचुल । उ॰—नैना हरि अंग रूप लुबधेरे माई । लोक लाज कुल की मर्यादा बिसराई । जैसे चंदा चकोर, मृगी नाद जैसे । कंचुरि ज्यों त्यागि फनिक फिरत नहीं तैसे ।—सूर (शब्द॰) ।