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कपट

विक्षनरी से

कपट

  1. छल, धोखा या चालाकी से किया गया व्यवहार।
  2. भीतर कुछ और और बाहर कुछ और दिखाने का प्रयास; दोगलापन।

(Delhi) आईपीए(कुंजी): /kə.pəʈ/

उदाहरण वाक्य

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  • राम ने जीवन भर कपट से दूर रहकर सत्य का साथ दिया।
  • कपट करके अर्जित धन टिकता नहीं।

प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कपट संज्ञा पुं॰ [सं॰] [वि॰ कपटी]

१. अभिप्राय साधन के लिये हृदय की बात को छिपाने की वृत्ति । छल । दंभ । धोखा । उ॰—(क) जो जिय होत न कपट कुचाली । केहि सुहात रथ, बाजि, गजाली ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) सती कपट जानेउ सुरस्वामी । सबदरसी सब अंतरजामी ।—मानस, १ ।५३ । क्रि॰ प्र॰—करना ।—रखना । यौ॰—कपटचक=चिड़िय़ा फँसाने के लिये बिखेरा दाना । फँसान की युक्ति । कपटतापस=बनावटी या बना हुआ साधु । कपटनाटक=ठगना । धोखेबाजी । कपट व्य़वहार करना । कपटप्रबंध=धोखा देने की योजना । कपटवेश=बनावटी भेस । कपटलेख्य=द्विचर्थक या जाली दस्तावेज ।

२. दुराव । छिपाव । क्रि॰ प्र॰—करना ।—रखना ।