कबाब

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

कबाब संज्ञा पुं॰ [अ॰] सीखों पर भूना हुआ मांस । विशेष—खूब बारीक कटे या कुटे हुए मांस को बेसन में मिलाकर नमक और मसाले देकर गोलियाँ बनाते हैं । इन गोलियों को लोहे की सोख में गोदकर घी का पुट देकर कोयले की आँच पर भूनते हैं । क्रि॰ प्र॰—करना ।—भूनना ।—लगना ।—लगाना ।—होना । मुहा॰—कबाब करना = जलाना । दुःख देना । कष्ट पहुँचाना । कबाब लगना = कबाब पकना । कबाब होना = (१)भुनना । जलना । (२) क्रोध से जलना । जैसे,—तुम्हारी बात सुनकर तो देह कबाब हो जाती है ।