कभी

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

कभी क्रि॰ वि॰ [हिं॰ कब+ही]

१. किसी समय । किसी घड़ी । किसी अवसर पर । जैसे, —(क) तुम वहाँ कभी गए हो ? (ख) हम वहाँ कभी नहीं गए हैं । विशेष—'कब' का प्रयोग उस स्थान पर होता है जहाँ क्रिया निश्चित होती है । जैसे, —तुम वहाँ कब गए थे ? 'कभी' का प्रयोग उस स्थान पर होता है जहाँ क्रिया और समय दोनों अनिश्चित हों । जैसे तुम वहाँ कभी गए हो ? मुहा॰—कभी का = बहुत देर से । कभी कभी = कुछ काल के अंतर पर बहुत कम । कभी कभार = कभी कभी । कभी न कभी = किसी न किसी समय । आगे चलकर अवश्य किसी अवसर पर । जैसे, —कभी न कभी तुम अवश्य माँगने आओगे । कभी कुछ कभी कुछ = एक ढंग पर नहीं । (इस वाक्य का व्याकरण संबंध दूसरे वाक्य के साथ नहीं रहता, जैसे, उनका कुछ ठीक नहीं, कभी कुछ कभी कुछ) ।

कभी कभी लोग इसका शिकार गड़्ड़े खोदकर करते हैं । रात को जब यह जंतु गड़्ढों में गिरकर फंस जाता है तब लोग इसे मार ड़ालते हैं । इसके चमड़े से एक प्रकार का लचीला और मजबूत चाबुक बनता है जिसे 'करवस' कहते हैं । मिस्त्र देश में इस चाबुक का प्रचार है । वहाँ की प्रजा इसकी मार से बहुत डरती है । पहले नील नदी के किनारे दरियाई घोड़े बहुत मिलते थे, पर अब शिकार होने कारण बहुत कम हो चले हैं ।