कर्ज

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

कर्ज संज्ञा पुं॰ [अ॰ कर्ज] ऋण । उधार । क्रि॰ प्र॰ —अदा करना ।—करना ।—काढ़ना ।—खाना ।— चुकना ।—चुकना ।—देना ।—पटना ।—पटाना ।— लेना ।—होना । मुहा॰—कर्ज उतारना=कर्ज देना या चुकाना । उधार बेबाक करना । कर्ड उठाना=ऋण लेना । ऋण लेना । ऋण का बोझ ऊपर लेना । कर्ज खाना=(१) कर्ज लेना । (२) उपकृत होना । दबायल होना । वश में होना । जैसे,—क्या हमने तुम्हारा कर्ज खाया है, जो आँख दिखाते हो? कर्ज खाए बैठना=दे॰ 'उधार खाए बैठना' । यौ॰—कर्जदार ।