काना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

काना ^१ वि॰ [सं॰त काण] [स्त्री॰ कानी] जिसकी एक आँख फूट गई हो । जिसे एक आँख न हो । एकाक्ष । एक आँख का । उ॰— काने खोरे कूबरे कुटिल कुचाली जानि ।—मानस, २ ।१४ । मुहा—काने का आगे पड़ना या काने का मिलना = किसी के रास्ते में काने आदमी का दिख जाना दिखाई पडना । विशेष—यह अपशकुन माना जाता है । काने को काना कहना = बुरे को बुरा कहना । उ॰—बात सच है, जल मरेगा वह मगर, लोग काना को अगर काना कहें ।— चोखे॰, पृ॰ २७ ।

काना ^२ वि॰ [सं॰ कर्णक] (फल आदि) जिनका कुछ भाग कीड़ों ने खा लिया हो । कन्ना । जैसे, —काना भंटा ।

काना ^३ संज्ञा पुं॰ [सं॰ कर्ण] 'आ' की मात्रा जो किसी अक्षर के आगे लगाई जाती है और जिसका रूप (ा) है जैसे,—वाला में का (ा), ।

काना ^४ वि॰[ सं॰ कर्ण] जिसका कोई कोना या भाग निकला हो । तिरछा । टेढा । जैसे,—कपडे में से टुकडा काटकर तुमने उसे काना कर दिया ।

काना ^५ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ काना] पासे में की बिंदी पौ । जैसे,— तीन काने ।

काना † संज्ञा पुं॰ [सं॰ कर्दम, हिं॰ काँदो] दे॰ 'काँदो' । यौ॰—पानीकानौ ।