कालीन

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

कालीन ^१ वि॰ [सं॰] कालसंबंधी । जैसे, समकालीन, प्राक्कालीन, बहुकालीन । उ॰—देखत बालक बहु कालीन ।—तुलसी (शब्द॰) । विशेष—यह शब्द समस्त पद के अंत में आता है, अकेला व्यवहार में नहीं आता ।

कालीन ^२ संज्ञा पुं॰ [अं॰ कालीन] ऊन या सूत के मोटे तागों का बना हुआ विछावन, जो बहुत मोटा और भारी होता है और जिसमें रंग विरगे बेलबूटे बने रहते हैं । गलीचा । विशेष—इसका ताना खड़े बल रखा जाता है अर्थात् छत से जमीन की ओर लटकता हुआ होता है । रंग बिरंगे तागों के टुकड़े लेकर बानों के साथ गाँठते जाते है और उनके छारों को काटते जाते है । इन्ही निकले हुए छारों के कारण कालीन पर रोएँ जान पड़ते हैं । कालीन का व्यवसाय भारतवर्ष में कितना पुराना है, इसका ठीक ठीक पता नहीं मिलता । संस्कृत ग्रंथों में दरी या कालीन के व्यवसाय का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता । बहुत से लोगों का मत है कि यह कला मिस्र देश से बाबिलन होती हुई और देशों में फैली । फारस में इस कला की बहुत उन्नति हुई । इससे मुसलमानों के आने पर देश में इस कला का प्रचार बहुत बढ़ गया और फारस आदि देशों से और करीगर बुलाए गए । आईने अकबरी में लिखा है कि अकबर ने उत्तरीय भारत में इस कला का प्रचार किया, पर यह कला अकबर के पहले से यहाँ प्रचलित थी । कालीनों की नक्काशी अधिकांश फारसी नमूने की होती है, इससे यह कला फारस से आइ बतलाई जाती है । ईरान की कालनी संसार में सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है ।