किधर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

किधर क्रि॰ वि॰ [हिं॰] किस ओर । किस तरफ । जैसे,—तुम आज किधर गए थे । मुहा॰—किधर आया किधर गया = किसी के आने आने की कुछ भी खबर नहीं । जैसे—हम तो चारपाई पर बेसुध पड़े थे, जानते ही नहीं कौन किधर आया गया । किधर का चाँद निकला? = यह कैसी अनहोना बात हुई? यह कैसी बात हुई जिसकी कोई आशा न थी । विशेष—जब किसी से कोई ऐसी बात बन पड़ती है जिसकी उससे आशा, नहीं थी, या कोई मित्र अचानक लिये जाता है, तब इस वाक्य का प्रयोग होता है । किधर जाऊँ, क्या करुँ = कौन सा उपाय करूँ? कोई उपाय नहीं सुझता ।