किराया

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

किराया संज्ञा पुं॰ [अ॰ किरा, फा॰ किरायह्] वह दाम जो दूसरे की कोइ वस्तु काम में लाने के बदले उस वस्तु के मालिक को दिया जाय । भाड़ा । क्रि॰ प्र॰—उतरना । उतारना ।—करना ।—चढ़ना ।—चुकाना ।—देना ।—लेना । यौ॰—किरायादार = किराये पर लेने वाले व्यक्ति । मुहा॰—किराया उतरना = किराया वसूल होना । किराया उतारना = भाड़ा वसूल करना । किराए करना = भाड़े पर लेना । जैसे—एक गाड़ी किराए कर लो । किराए पर देना = अपनी वस्तु को दूसरे के व्यवहार के लिये कुछ धन के बदले में देना । किराए पर लेना = दूसरे की वस्तु का कुछ दाम देकर व्यवहार करना ।