किसी

विक्षनरी से
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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

किसी ^१ सर्व॰, वि॰ [हिं॰ किस+ ही] हिंदी के प्रश्नार्थक क' श्रृंखला का वह रूप जो उसे विभक्ति लगने से पहले प्राप्त होता है । जैसे, किसी ने, किसी को, किसी पर आदि ।

किसी ^२ वि॰ हिंदी के प्रशनार्थक 'क' श्रृंखला का वह रूप जो उसे उस समय प्राप्त होता है जब उसके विशेष्य में विभक्ति लगाई जाती है । मुहा.—किसी न किसी=कोई न कोई । कोई एक । एक न एक ।

किसी पर तान तोड़ना = किसी को लक्ष्य करके खेद या क्रोंधसूचक बात कहना । आक्षेप करना । बौछार छोड़ना । तान भरना, मारना, लेना = गाने में लय के साथ सुरों को खींचना । अलापना । तान की जान = सारांश । खुलासा । सौ बात की एक बात ।

३. ज्ञान का विषय । ऐसा पदार्थ जिसका बोध इंद्रियों आदि को हो ।

४. कंबल का तान — (गडे़रिए) ।

५. भाटे का हलड़ा । लहर । तरंग ।— *(लश॰) ।

६. लोहे की छड़ जिसे पलंग या हौदे में मजबूती के लिये लगाते हैं । (७) एक प्रकार का पेड़ । (८) सूत्र । सूत । धागा (को॰) ।(९) एकरस स्वर । एक ही प्रकार का स्वर (को॰) ।

किसी बात का स्थिर होना । उ॰—अहैं ग्यारहें भौम अस भरत कुंडली नेत ।—रघुराज (शब्द॰) ।

२. निश्चय । ठहराव । ठान । संकल्प । इरादा । उ॰—(क) आजु न लान देहुँ री ग्वालिन बहुत दिनन को नेत ।—सूर (शब्द॰) । (ख) चार चोर चामीकर हेतू । किय मारन जयदेवहि नेतू ।—रघुराज (शब्द॰) ।

३. व्यनस्था । प्रबंध । आयोजन । बंदिश । ढंग । उ॰—(क) हाय हाय माच्यी विश्वधाम बीच भाखैं सुर काल काहे प्रभु बाँधे प्रलय नेत है ।—रघुराज (शब्द॰) । (ख) नेत करन की है गति तोरी । जामें जाय बात नहिं मोरी ।—रघुराज (शब्द॰) ।

किसी प्रसंग की चर्चा चनाना या छेड़ना । उ॰—(२) फिरि फिरि नृपति चलावत बात । कहो सुमत कहाँ तें पलटे प्रान- जिनव कैसे बन जात ।—सूर (शब्द॰) । (ख) ऊधो कत ये बातें चाली । कछु मीठी कछु करुई हरि की अंतर में सब साली ।—सूर (शब्द) । (अमुक की) बात मत चलाओ = इस संबंध में (अमुक की) चर्चा करना (द्दष्टांत या उदारहण के लिये व्यर्थ है । (अमुक का) दृष्टांत देना ठीक नहीं है । जैसे,—उनकी बात मत चलाओ;वे रुपए बाले हैं सब कुछ खर्च कर सकते हैं । (अमुक की) बात क्या चलाते हो = दे॰ 'बात मत चलाओ' । बात छिड़ना = दे॰ 'बात चलना' । बात छेड़ना = दें 'बात चलाना' । बात निकालना = बात चलाना । बात पड़ना = किसी किसी विषय का प्रसंग प्राप्त होना । चर्चा छिड़ना । जैसे,—बात पड़ी इसलिये मैंने कहा, नहीं तो मुझपे क्या मतलब ? बात मुँह पर लाना = (कसी विषय की) चर्चा कर बैठना । जैसे,—किसी के सामने यह बात मुँह पर न लाना ।

३. फैली हूई चर्चा । प्रचलित प्रसंग । खबर । अफवाह । किंव- दंती । प्रवाद । मुहा॰—बात उड़ना = चारों ओर चर्चा फैलना । किसी विषय का लोगों के बीच प्रसिद्ध होना या प्रचार पाना । उ॰— झूठी ही यह बात उड़ी है राधा कान्ह नर नारी । रिस की बात सुता के मुख सों सुनत हँसी मन ही मन भारी ।—सूर (शब्द॰) । (किसी पर) बात आना = दोषा- रोपण होना । दोष लगना । कलंक लगना । बुराई आना । बात फैलाना = चर्चा फैलना । बात लोगों के मुँह से चारों ओर सुनाई पड़ना । प्रसिद्ध होना । बात फैलाना = इधर उधर लोगों में चर्चा करना । प्रसिद्ध करना । बात बहना = चारों ओर चर्चा फैलना । बात उड़ना । उ॰—जे हम सुनति रही सो नाहिं ऐसी ही यह बात बहानी ।—सूर (शब्द॰) । (किसी पर) बात रखना, लगाना या लाना = दोष लगाना । कलंक मढ़ना । इलजाम लगाना । लांछत रखना ।

४. खोई वृत्त या विषय जो शब्दों द्वारा प्रकट किया जा सके या मन में लाया जा सके । जानी जाने या जताई जानेवाली वस्तु या स्थिति । मामला । माजरा । हाल । व्यवस्था । जैसे,—(क) बात क्या है कि वह अबतक नहीं आया ? (ख) उनकी क्या बात है ! (ग) इस चिट्ठी में क्या बात लिखी है ? उ॰—क्यों करि झूठो मानिए सखि सपने की बात— पद्माकर (शब्द॰) । मुहा॰—बात का बतंगड़ करना = (१) साधारण विषय या घटना को व्यर्थ विस्तार देकर वर्णन करना । छोटे से मामले को बहुत बढ़ाकर कहना । (२) किसी साधारण घटना को बहूत बड़ा या भीषण रूप देना । छोटे से मामले को व्यर्थ बहुत पेवोदा या भारी बना देना । बात ठहरना = किसी विषय में यह स्थिर होना कि ऐसा होगा । मामला तै होना । जैसे—हमारे उनके यह बात ठहरी है कि कल सवेरे यहाँ से चल दें । बात डालना = विषय उपस्थित करना । मामला पेश करना । जैसे,—यह बात पँचों के बीच डाली जाय । बात न पूछना = दशा पर ध्यान न देना । ख्याल न करना । परवा न करना । उ॰—मीन वियोग न सहि सकै नीर न पूछै बात ।—सूर (शब्द॰) । बात पर धूल डालना = किसी काम या घटना को भूल जाना । मामले का ख्याल न करना । गई कर जाना । बात पी जाना = जो कुछ हो गया हो उसका ख्याल न करना । जाने देना । दर गुजर करना । बात बतंगड़ होना = किसी साधारण घटना का अर्थ कुछ का कुछ कर लिया जाना या समझना । उ॰—जहाँआरा बेगम देख लेंगी तो क्या जाने क्या बात बतंगड़ हो ।— फिसाना॰, भा॰ ३, पृ॰ ३०२ । बात बढ़ना = मामले का तूल खींचना । किसी प्रसंग या घटना का घोर रूप धारण करना । जैसे,—प्रब बात बहुत बढ़ गई है, समझाना बुझाना व्यर्थ है । बात बढ़ाना = मले को तूल देना । किसी प्रसंग, परिस्थिति या घटना को घोर रूप देना । जैसे,—जो हूआ सो हुआ, अब अदालत में जाकर क्यों बात बढ़ाते हो ? बात बनना = (१) काम बनना । प्रयोजन सिद्ध होना । मामला दुरुस्त होना । सिद्धि प्राप्त होना । उ॰—खोज मारि रथ हाँकहु ताना । आन उपाय बनहि नहिं बाता ।—तुलसी (शब्द॰) । (२) संयोग या घटना का अनुकूल होना । अच्छी परिस्थिति होना । बोलबाला होना । अच्छा रंग होना । बात बनाना या सँवारना = काम बनाना । कार्य सिद्ध करना । मतलब गाँठना । सिद्धि प्राप्त करना । संयोग या परिस्थिति को अनुकूल करना । जैसे,—यह तो सारा मामला बिगाड़ चुका था, तुमने आकर बात बना दी । उ॰—(क) चतुर गंभीर राम महतारी । बीच पाय निज बात सँवारी ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) भरत भगति तुम्हरे मन आई । तजहु सोच विधि बात बनाई ।—तुलसी (शब्द॰) । बात बात पर या बात बात में = प्रत्येक प्रसंग पर । थोड़ा सा भी कुछ होने पर । हर काम में । जैसे,—तुम बात बात में विगड़ा करते हो, कैसे काम चलेगा ? बात विगड़ना = (१) कार्य नष्ट होना । काम चौपट होना । मामला खराब होना । अच्छी परिस्थिति न होकर वुरी परिस्थिति हो जाना । (३) प्रयोजन सिद्ध न होना । विफलता होना । जैसे—तुम्हारे वहाँ न जाना में सारी बात बिगड़ गई । बात बिगाड़ना या बिगारना = कार्य नष्ट करना । काम चौपट करना । मामला खराब करना । बुरी परिस्थिति लाना । उ॰—विधि बनाइ सब बात बिगारी ।—तुलसी (शब्द॰) ।

५. घटित होनेवाली अवस्था । प्राप्त संयोग । परिस्थिति । जैसे,—(क) इससे एक बात होगी कि वह फिर कभी न आवेगा । (ख) रास्ते में कोई बात हो जाय तो कौन जिम्मेदार होगा ।

६. दूसरे के पास पहुँचाने के लिये कहा हुआ वचन । संदेश । संदेसा । पैगाम । उ॰—ऊवो ! हरि सों कहियो बात ।—सूर (शब्द॰) ।

७. परस्पर कथोपकथन । संवाद । वार्तालाप । गपशप । वाग्विलास । जैसे,—क्यों बातों में दिन खोते हो ? यौ॰—बातचीत । मुहा॰—बातों बातों में = बातचीत करते हुए । कथोपकथन के बीच में । जैसे,—बातों ही बातों में वह बिगड़ खड़ा हुआ ।

८. किसी के साथ कोई व्यवहार या संबंध स्थिर करने के लिये परस्पर कथोपकथन । कोई मामला तै करने के लिये उसके संबंध में चर्चा । जैसे—(क) ब्याह की बात । (ख) इस मामले में मुझसे उनसे बात हो गई है । (ग) जिससे पहले बात हुई है उसी के साय सीदा बेचेंगे । यौ॰—बातचीत । मुहा॰—बात ठहरना = (१) ब्याह ठीक होना । विवाह संबंध स्थिर होना । (२) किसी प्रकार का निश्चय होना । बात लगना = विवाह के संबंध में प्रस्ताव आदि होना । बात लगाना = विवाह का प्रस्ताव करना । ब्याह संबंध स्थिर करने के लिये कहीं कहना सुनना । बात लाना = वर या कन्या पक्ष से विवाह का प्रस्ताव लाना ।

९. फँसाने या धोखा देने के लिये कहे हुए शब्द या किए हुए व्यवहार । जैसे,—तुम उसकी बातों में न आना । मुहा॰—बातों में आना या जाना = कथन या व्यबहार से धोखा खाना ।

१०. झूठ या बनावटी कथन । मिस । बहाना । जैसे,—यह सब तो उसकी बात है ।

११. अपने भावी आचरण के संबंध में कहा हुआ वचन । प्रतिज्ञा । कौल । वादा । जैसे,—वह अपनी बात का पक्का है । मुहा॰—बात का धनी, पक्का या पूरा = प्रतिज्ञा का पालन करनेवाला । कौल का सच्चा । मुँह से जो कहे वही करनेवाला । दृढ़प्रतिज्ञा । बात का कच्चा या हेठा = प्रतिज्ञा भंग करनेवाला । (अपनी) बात नक्की करना = दे॰ 'बात पक्की करना' । बात पर न रहनेवाला = प्रतिज्ञा भंग करनेवाला । कौल पूरा न करनेवाला । बात पक्की करना = (१) परस्पर स्थिर करना कि ऐसा ही होगा । द्दढ़ निश्चय करना । (२) प्रतिज्ञा या संकल्प पुष्ट करना । वचन देकर और वचन लेकर किसी विषय में कर्तव्य स्थिर करना । बात पक्की होना = (१) स्थिर होना कि ऐसा ही होगा । (२) प्रतिज्ञा या संकल्प का दृढ़ होना । बात पर आना = अपने कहे हुए धचन के अनुसार ही काम करने के लिये उतारू होना । जैसा मेंने कहा बैसा ही हो, ऐसा हठ या आग्रह करना । बात पर जाना = कथन या प्रतिज्ञा पर विश्वास करना । कहे का भरोसा करना । (अपनी) बात रखना = वचन पूरा करना । प्रतिज्ञा का पालन करना । उ॰—वेद विदित बहु धर्म चलाउव राखु हमारी बाता ।—रघुराज (शब्द॰) । बात हारना = प्रतिज्ञा करना । वादा करना । वचन देना । जैसे,—मैं बात हार चुका हूँ नहीं तो तुम्हीं को देता ।

१२. वचन का प्रमाण । साख । प्रतीति । विश्वास । जैसे,— जिसकी कबात गई उसकी जात गई । मुहा॰—(किसी की) बात जाना = बात का प्रमाण न रहना । (लोगों को) एतबार न रह जाना । बात खोना = साख बिगाड़ना । ऐसा काम करना जिससे लोग एतबार करना छोड़ दें । बात बनना = साख रहना । विश्वास रहना । जैसे,—अभी बाजार में उनकी बात बनी है । बाद हेठी होना = बात का प्रमाण था साख न रह जाना । वचन का विश्वास या प्रतिष्ठा उठ जाना । बात की कदर न रह जाना ।

१३. मानमर्यादा । छाप । प्रतिष्ठा । इज्जत । कदर । जैसे,— अपनी बात अपने हाथ । उ॰—सुनो राजा लंकपति, आज तेरी बात अति, कौन, सुरपति, धनपति, लोकपति है ।— तुलसी (शब्द॰) । मुहा॰—बात खोना = प्रतिष्ठा नष्ठ करना । इज्जत गँवाना । ऐसा काम करना जिससे लोग आदर प्रतिष्ठा करना छोड़ दें । बात जाना = प्रतिष्ठा नष्ट होना । इज्जत न रह जाना । उ॰—उचित यासु निग्रह अब भाई । नतरु बात जदुकुल की जाई ।—गोपाल (शब्द॰) । बात बनना = प्रतिष्ठा प्राप्त होना । इज्जत पैदा होना । रंग जमना । लोगों पर अच्छा प्रभाव होना । जैसे,—दस आद- मियों में उनकी बात बनी हुई है । (अपनी) बात बना लेना = लोगों में प्रतिष्ठा प्राप्त कर लेना । लोगों के बीच इज्जत पैदा करना । नाम या यश प्राप्त करना । बात बिगाड़ना = (१) प्रतिष्ठा न रहना । इज्जत न रहना । लोगों के वीच वैसा आदर या संमान न होना । (२) हैसियत बिगड़ना । दिवाला निकलना । बात बिगाढ़ना = प्रतिष्ठा नष्ट करना । इज्जत खोना । ऐसा काम करना जिससे साख या मर्यादा न रह जाय़ । बात रख लेना = प्रतिष्ठा नष्ट न होने देना । इज्जत न बिगड़ने देना । बात रह जाना = मान मर्यादा रह जाना । इज्जत रह जाना ।

१४. अपनी हैसियत, योग्यता, गुण, सामर्थ्य आदि के संबंध में कथन या वाक्य । जैसे,—अब तो वह बहुत लंबी चौड़ी बातें करता है ।

१५. आदेश । उपदेश । सीख । नसीहत । जैसे,— बड़ों की बात माना करो । क्रि॰ प्र॰—पर चलना ।—मानना । मुहा॰—बात उठाना = बात न मानना । कथन या आदेश का पालन न करना । कहे अनुसार न चलना ।

१६. रहस्य । भेद । मर्म । गुप्त विषय । जैसे,—इसके भीतर कोई बात है । मुहा॰—बात खुलना = गुप्त विषय प्रकट होना । छिपी व्यवस्था ज्ञात होना । छिपा मामला जाहिर होना । बात फूटना = गुप्त विषय का कई आदमियों पर प्रकट हो जाना । रहस्य प्रकाशित होना ।

१७. तारीफ की बात । प्रशंसा का विषय । जैसे,—उससे पहले पहुँचो तब तो बात ।

१८. उक्ति । चमत्कारपूर्ण कथन ।

१९. गूढ़ अर्थ । अभिप्राय । मानी । उ॰—चतुरन की कहिए कहा बात बात में बात ।—(शब्द॰) ।