कुछ

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

कुछ विशेष स्थानों में काम आवे । बह नियम जो अपने निर्दिष्ट विषय के अतिरिक्त दुसरे विषयों में भी काम आए ।

३. विस्तारण (को) ।

४. भिन्न तथा विरोधी विषयों या वस्तुओं में कुछ विशेष तत्वों की होनेवालि समानता या सादृश्य । (को॰) विशेष—यह अतिदेश शास्त्र, कार्य निर्मित्त, व्यपदेश और रुपभेद से पाँच प्रकार का कहा गया है । जैमिनि मीमांसासुत्र के सातवें और श्राठवें अध्याय में इसका विवेचन है ।

कुछ वि॰ [सं॰ कचित् पा॰ किंची पू॰ हिं॰ कछु किछु] थोड़ी संख्या या मात्रा का । जरा । थोड़ा सा । टुक । जैसे— (क) देखो पेड़ में कुछ फल हैं । (ख) लोग आ रहे हैं । (ग) कुछ देर ठहरो तो बातचीत करें । मुहा॰—कुछ एक=थोड़ा सा । कुछ ऐसा=विलक्षण । असाधारण । जैसे—(क) रात तो कुछ ऐसी नींद आई कि पड़ते ही सो गए । (ख) वह लड़का कुछ ऐसा घबडा़या कि भागते ही बना । कुछ कुछ=थोड़ा । जैसे—आज बुखार कुछ कुछ उतरा है । कुछ न कुछ=थोड़ी बहुत । कम या ज्यादा । बहुत कुछ । कितना कुछ=बहुत अधिक ।

कुछ ^२ सर्व॰ [सं॰ कश्चित् प्रा॰ कोचि]

१. कोई (वस्तु) । जैसे,— कुछ खाओ तो ले आवें । (ख) कुछ दिलवाओ । (ग) हम कुछ नहीं जानते । मुहा॰—कुछ का कुछ = और का और । विपरीत उलटा । जैसे—वाह सदा कुछ का कुछ समझना है । कुछ से कुछ होना = भारी उलट फरे होना । विशेष परिवर्तन हो जाना । कुछ कह बैठना = कड़ी बात कह देना । ऊची नीची सुना देना । गाली दे देना । कुछ कहना = कड़ी बात कहना । गाली देना । बिगड़ना । जैसे—तुम्हें किसी ने कुछ कहा है? कुछ सुनोगे या कुछ सुनने पर लगे हो = ऊँचा नीचा सुनोगे । गाल खाओगे । जैसे—तुम नहीं मानते हो, अब कुछ सुनोगे । कुछ खा लेना = विष खा लेना जैसे—इसने कुछ खा तो नहीं लिया । कुछ खाकर मर जाना = विष खाकर भर जाना । कुछ कर देना = जादू टोना कर देना । मंत्रप्रयोग कर देना । जैसे— जान पड़ता है कि किसी ने उसपर कुछ कर दिया है । कुछ हो जाना = कोई रोग या भूत । प्रेत की बाधा हो जाना जैसे—उसको कुछ हो तो नहीं गया । (किसी बुरी बात) या वस्तु का नाम लेकर लोग कभी कभी केवल इसी सर्वनाम का प्रयोग कर लेते है जैसे—उसे कुछ हो तो नहीं गया । उसने कुछ खा तो नहीं लिया? किसी ने कुछ कहा तो नहीं? इत्यादि । कुछ हो=चाहे जो हो ।

२. कोई बड़ी बात । कोई अच्छी बात । जैसे, —यदि (५०) ही दिए तो कुछ नहीं किया ।

३. कोई सार वस्तु । कोई काम की वस्तु । जैसे, —उसमें तो कुछ भी नहीं निकला । मुहा॰—कुछ (कछु) न रहना = इज्जत न रहना । प्रतिष्ठा न रहना । उ॰—नंददास प्रभु कछु न रहैगी, जब बरतन उधरौंगी ।—नंद ग्रं॰ ,पृ॰ ३६२ । कुछ लगाना = (अपने को) बड़ा या श्रेष्ठ समझना । कुछ हो जाना = किसी योग्य हो जाना । किसी बात में समर्थन या किसली गुण से युक्त हो जाना । गणमान्य हो जाना । जैसे, —(क) यह लड़का परिश्रम करेगा तो कुछ हो जायगा । (ख) यदि यह काम चमक गया तो हम भी कुछ हो जायँगी ।

कुछ अदल बदल न हो सके । अटल । अचल

३. अविनाशी । विनाशरहित ।

४. छिपा हुआ । गुप्तष अंतर्व्याप्त । पोशीदा ।

कुछ दिनों तक पहना हुआ कपडा । उ॰— हमारा जूठन खा- कर, हमारा पहिरन पहिनकर इनके बच्चे पलते हैं । —रति॰, पृ॰ ५५ ।