कूदना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

कूदना ^१ क्रि॰ अ,॰ [सं॰ स्कृन्दन या सं,॰ कुर्दन प्रा॰ कुंदन]

१. दोनों पैरों को पृथिवी या किसी दूसरे आधार पर से बलपूर्वक उठा कर शरीर को किसी और फेंकना । उछलना । फाँदना । जैसे—वह यहाँ से कूदकर वहाँ चला गया ।

२. जान बूझकर ऊपर से नीचे की ओर गिरना । जैसे—वह स्त्री कुएँ में कुद पड़ी ।

३. किसी काम या बात के बीच में सहसा आ मिलना या दखल देना । कैसे—तुम यहाँ कहाँ से कूद पड़े?

४. क्र म भंग करके एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँच जाना । जैसे,— तुम तो अभी चौथा पन्ना पढ़ने थे; बीसबें पन्ने में केसे कूद गए ?

५. अत्यंत प्रसन्नहोना । खुशी से फूलना । उछलना ।

६. बढ़ बढ़कर बातें करना । शेखी बघारना । मुहा॰—किसी के बल पर कूदना = किसी का सहारा पाकर बहुत बढ़ बढ़कर बोलना ।

कूदना ^२ क्रि॰ स॰ किसी वस्तु की एक और से दूसरी ओर चला जाना । उल्लंघन कर जाना । लाँघ जाना । फलाँग जाना । जैसे—जब महाबीर जी समुद्र कूद गए, तब सबको बड़ा आश्चर्य हुआ । संयो॰ क्रि॰—जाना ।—पड़ना । यौ॰ .—कूदाकूदी । कूदफाँद ।