कृपाण

विक्षनरी से
Jump to navigation Jump to search

हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

कृपाण संज्ञा पुं॰ [सं॰] [स्त्री॰ अल्पा॰ कृपाणी]

१. तलवार ।

२. कटार ।

३. दंड़क वृत्त का एक भेद । विशेष—यह छंद ३२ वर्णों का होता है । आठ आठ वर्णा पर यति होती है । इसमें ३१ वाँ वर्ण गुरु और ३२वाँ लघु होता है । यतियों पर अनुप्रासों का मिलान और अंत में 'निकार' का होना इस छंद की जान है । उ॰— चली ह्वँ कै विकराल, महा कालहू को काल, किये दोऊ दुग लाल, धाय रण समुहान । तहाँ लागे लहरान, निसिचरहू पराव, वहाँ कालिका रिसान, झुकि झारी किरपान ।