कैसे

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

कैसे जग को अपना सकती, कैसे उसके मन को जँचती ।— प्रलय सृजन पृ॰ १२ । विशेष—व्यक्त चेतना को दो भागें में विभाजित किया जाता है ।—केंन्द्रीय भाग और सीमांत भाग अथवा चेतना की कोर । सीमांत भाग या चेतना की कोर का ही नाम उपचेतन या अवचेतन है । इस भाग में विचार भाव और अनुभव रहते हैं । जिनके विषय में हमें अभी, इस स्थल पर तो कोई ज्ञान नहीं है, पर चेष्टा करते ही हमें उसका ज्ञान हो सकता है ।

कैसे क्रि॰ वि॰ [हि॰ कैसा] किस प्रकार से । किस ढंग से? जैसे,— यह काम कैसे होगा? ।

२. किस हेतु? किसालिये? क्यों? जैसे,—तुम यहाँ कैसे आए?