को

विक्षनरी से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

को ^१ पु सर्व [सं॰ कः]

१. कौन । उ॰— तू को, कौन देस है तेरी । कै छल गह्यो राज सब मेरो ।— सुर॰, १ । २९० ।

२. कोई । उ॰— पैदा जाको हुआ है वो सब उनों किया है ।—दक्खिनी॰ पृ॰, २१२ ।

३. क्या । उ॰— इतर धातु पाह- नहि परसि कंचन ह्वै सोहैं । नंदसुवन को परम प्रेम इह इचरज को है ।—नंद॰ ग्रं॰, पृ॰, ८ ।

को ^२ (प्रत्य॰) [हिं॰] कर्म और संप्रदान का विभक्ति प्रत्यय । जैसे—साँप को मारी । राम को दो । उ॰— और विद्या की अभ्यास विशेष हतो ।— अकबरी॰ पृ॰, ३८ ।