कोष्ठक

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

कोष्ठक संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. किसी प्रकार की दावार, लकीर या और कोई चीज जो किसी स्थान या पद को घेरने का काम में आती हो ।

२. किसी प्रकार का चक्र जिसमें बहुत से खाने या घर हों । सारणी ।

३. लिखने में एक प्रकार का चिह्नों का जोड़ा जिसके अंदर कुछ वाक्य या अंक आदि लिखे जाते हैं । यह कई प्रकार का होता है, जैसे,—( ), [ ] आदि । विशेष—(क) जब यह चिह्न किसी वाक्य के अंतर्गत आता है, तब इसके अंदर आए हुए शब्दों का परस्पर तो व्याकरण संबंध होता है, [कोष्ठक सारणी] पर प्रधान वाक्य से व्याख्यान या निदर्शनरूप अर्थसंबंध होते हुए भी प्रायः उसका व्याकरणसंबंध नहीं होता । (ख) गणित में इन चिह्नों के अंतर्गत आए हुए अंक कुल मिलाकर एक समझे जाते है और उनमें से किसी एक अंक का कोष्ठक के बाहरवाले किसी अंक से कोई स्वतत्र संबंध नहीं होता ।

४. कोष्ठ । अन्नभंडार ।

५. चहारदीवारी ।

६. ईंट, चूना आदि से निर्मित वह स्थान जहाँ पशु जल पीते हों (को॰) ।