क्यों

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

क्यों क्रि॰ वि॰ [सं॰ किम]

१. किसी व्यापार या घटना के कारण की जिज्ञासा करने का शब्द । किस कारण ? किस निमित्त ? किसलिये ? किस वास्ते ? जैसे,—तुम वहाँ क्यों जा रहे हो ? यौ॰—क्योंकि = इसलिये कि । इस कारण कि । जैसे,—अब यहाँ से जाओ, क्योंकि वह आता होगा । मुहा॰—क्योंकर = किस प्रकार ? कैसे ? जैसे,—मै यहाँ क्योंकर रह सकता हुँ ? उ॰—हम क्यों कर उसको बुरा कहें । प्रेमघन॰, भा॰ २, पृ॰३३ । क्यों नहीं =(१) ऐसा ही है । ठीक कहते हो । नि:संदेह । बेशक ।—(किसी बात के समर्थन में ) । (२) हाँ । जरुर ।—(स्वीकार में) । जैसे॰—प्रश्न—तुम वहाँ जाओगे ? उत्तर—क्यों नहीं । (३) ऐसा नहीं है । ठीक नहीं करते हो । —(व्यर्ग) । (४) कभी नहीं । मैं ऐसा नहीं कर सकता ।—(व्यग्य) । क्यों न हो=(१)तुम ऐसे महानुभाव से ऐसा उत्तम कार्य क्यों न हो ? वाह बा क्य ा खूब ? धन्य हो ? (२) ऐसी विलक्षण बात क्यों न कहोगे ? छि: —(व्यंग्य) ।

२. पु किस भाँती ? किस प्रकार ? कैसे ? उ॰—क्यों बसिए क्यों निबहिए, नीति नेह पुर नाहिं । लगा लगी लोयन करै, नाहक मन बँध जाहिं ।—बिहारी (शब्द॰) ।