खरबूजा

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

खरबूजा † संज्ञा पुं॰ [हिं॰ खरबूजा] दे॰ 'खरबूजा' ।

खरबूजा संज्ञा पुं॰ [फा॰ खरबुजह्]

१. ककड़ी की जाति की एक बेल ।

२. इस बेल का फल । विशेष— इसके फल गोल, ब़ड़े मेठे और सुगंधित होते हैं । इसके बीच प्राय: नदियों के किनारे पूस माघ में गढ़ड़े खोदकर बो दिए जाते हैं॰ और घास फूस से ढक दिए जाते हैं । जिनसे शीघ्र ही बहुत बड़ी बड़ी वेलें निकलकर चारों और खूब फैलती हैं । चैत मे आषाढ़ तक इसमें फल लगते हैं । इसकी खरदा, सफेदा, चितला आदि अनेक जातियाँ हैं । इसके बीज ठंढाई के साथ पीसकर पिए जाते हैं और कई तरह से चीनी आदि में पागकर खांए जाते हैं । बीजों से एक प्रकार का तेल भी निकल सकता हैं जो खाने और साबुन बनाने के काम मे आ सकता है । मुहा॰— खरबूजे को देखकर खर बूजे का रंग पकड़ना = किसी एक व्यक्ति की देखादेखी या संग से दुखरे का भी बंसा ही हो जाना ।