खर्च

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

खर्च संज्ञा पुं॰ [अ॰ खर्च]

१. किसी काम में किसी वस्तु का लगना । व्यय । सरफा । खपत । जैसे—(क) दस रुपए खर्च हो गए (ख) इस शहर में पानी का बहुत खर्च है । क्रि॰ प्र॰—करना ।—देना ।—बाँटना ।—होना । मुहा॰—खर्च उठाना = व्यय का भार सहना । खर्च करना । जैसे—इस महीने में उन्हें बहुत खर्च उठाना पड़ा । खर्च चलाना = व्यय का निर्वाह करना । आवश्यक व्यय के लिये धन देते रहना । खर्च में डालना = (१) व्यय करने के लिये विवश करना (२) किसी रकम को खर्च के मद में लिखना । खर्च निकलना = लागत प्राप्त होना । खर्च में पड़ना = (१) व्यय के लिये विवश होना । (२) किसी रकम का खर्च के मद में लिखा जाना । यो॰—ऊपरी खर्च = नियमित से अतिरिक्त या अनिश्चित व्यय । फुटकर खर्च ।

२. वह धन जो किसी काम में लगाया जाय । जैसे—उनके पास कुछ भी खर्च नहीं है । यौ॰—खर्चखानगी = (१) निजी खर्चा । व्यक्तिगत ब्यय ।

२. परिवारिक या घरेलू खर्च ।