गँमाना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

गँमाना पु क्रि॰ स॰ [हिं॰] दे॰ 'गँवाना' । उ॰—(क) जाके लिए गृह काज तज्यो, न सिखी सखियान की सीख सिखाई । बैर कियो सिगरे ब्रजगाम सौं, जाके लिए कृल कानि गँमाई ।— मति॰ ग्रं॰, पृ॰ ३०० । (ख) बसि निकुंज में रास रचायौ । बिया गँमाई मेंन की ।—पोद् दार अभि॰ ग्रं॰, मृ॰ २२८ ।