गन्धक

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

गंधक संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ गन्धक] [वि॰ गंधकी] एक खनिज पदार्घ जिसे वैद्यक में उपधातु माना है । विशेष—यह खरी और बिना स्वाद की और ज्वालग्रहिणी होती है । इसकी कलमें चमकदार होती हैं और इसे घिसने या गरम करने से इसमें से एक प्रकार की असह्य तीव्र गंध निकलती है । यह ज्वालामुखी पर्वतों से निकले पदार्थों में प्रायः मिलती हैं । धातुओं के साथ भी यह लगी मिलती है । गंधक पानी, अलकोहल और ईथर में नहीं घुलती, पर द्बिगंधित कार्बन, मिट्टी के तेल और वेंजीन में सुगमता से घुल जाती है । आग में जलने से इसमें से नीले रंग की लौ निकलती है । यह २३८ दर्जे की आँच में पिघलती है और ८२४ दर्जे की आँच में उबलने लगती है । उबलने के समय इसमें गुलाल रंग की घनी भाप निकलतो है । आइसलैंड़ के ज्वालामुखी पर्वतों के पास यह शुद्ध रूप में मिलती है, पर सिसली में यह नीली मिट्टी के साथ मिली हुई पाई जाती है । इसे साफ करने के लिये गंधक मिली हुई मिट्टी को एक गड्ढ़े में आग के ऊपर रखकर ऊपर से मिट्ठी डाल देते हैं । इससे गंधक जलने लगती है और पिघल पिघलकर नीचे गड्ढे में जमा होती जाती है । इसे हिंदुस्तान में फिर साफ करके पत्तियों के रूप में बनाते हैं । ये बत्तियाँ बाजार में ब्रिम स्टोन या गंधक की बत्तियाँ कहलाती हैं । गंधक प्रायः लोह ताँबे आदि धातुओं और कभी कभी पशु, पक्षी और बनस्पतियों में भी मिलती है । इससे रबर भी कड़ा करते हैं । चर्मरोग में यह लगाई और खिलाई भी जाती है । वैद्यक के ग्रेथों के अनुसार गंधक चार प्रकार की होती है, सफेद, लाल, पीली और नीली । पर लाल और सफेद गंधक देखने में नहीं आती; पीली और नीली मिलती है । नीली को तूतिया, नीला थोथा आदि कहते हैं । गंधक शब्द से आजकल केवल पीली गेधक समझी जाती है । कुछ लोग हरताल को भी एक प्रकार की गंधक मानते हैं । वैद्य लोग खाने के लिये गंधक को शोधते हैं । शोधने के लिये इसकी बुकानी को खौलते हुए घी में ड़ालते है । फिर जब घी में मिलो गंधक खूब गरम हो जाती है, तब उसे एत बर्तन नें दूध रखकर छानते हैं । जिससे गेधक छनकर नीचे बैठ जाती है । यह क्रिया तीन बार की जाती है । ड़ाक्टर लोग गंधक जलाकर वायु शुद्ध करते हैं । पर्या॰—गंधाश्मा । गंधमोहन । पूतिगंध । अतिगंध । बर । सुगंध दिव्यगंध । कीटघ । क्रूरगंध । गंधी । गंधिक । पामागंधा रसगंधक । सौग धिक । सुगंधिक कुष्ठारि । गौरीबीज ।

गंधक वि॰ [सं॰ गन्धग] गंधवाला । गंधयुक्त [को॰] ।