गरमी

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हिन्दी[सम्पादन]

संज्ञा[सम्पादन]

गरमी

मूल शब्द[सम्पादन]

  • गर्मी

अनुवाद[सम्पादन]


यह भी देखिए[सम्पादन]

हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

गरमी संज्ञा [फ़ा॰]

१. उष्णता । ताप । जलन । जैसे,— आग की गरमी । क्रि॰ प्र॰—करना ।—पड़ना ।—होना । मुहा॰गरमी करना = प्रकृति में उष्णता लाना । पेट या कलेजे में ताप उत्पन्न करना । जैसे, कुनैन बुहत गरमी करता है । गरमी निकालना = (१) उष्णता दूर करना । (२) प्रसंग करना ।

२. तेजी । उग्रता । प्रचंडता । मुहा॰—गरमी निकालना = गर्व दूर करना । जैसे,—अभी हम तुम्हारी सारी गरमी निकाल देते हैं ।

३. आवेश । क्रोध । गुस्सा । जैसे,—पहले तो बड़ी गरमी दिखाते थे; अब सामने क्यों नहीं आते ।

४. उमंग । जोश ।

५. ग्रीष्म ऋतु । कड़ी धूप के दिन । (साधारणतः फागुन से जेठ तक गरमी के महीने समझे जाते हैं ।) क्रि॰ प्र॰आना ।—जाना । मुहा॰—गरमियों में = गरमी के दिनों में । ग्रीष्मकाल में ।

६. हाथी घोड़ों का एक रोग जिसमें उन्हें पेशाब के साथ खून गिरता है ।

७. एक रोग जो प्रायः दुष्ट मैथुन से उत्पन्न होता है और छूत का रोग माना जाता है । आतशक । उपदंश । विशष—इस रोग में गुप्त इंद्रिय से एक प्रकार का चेप निकलता है, जिसके लग जाने से यह रोग एक दूसरे को हो जाता है । पहले छोटी छोटी फुंसियाँ होती है; फिर धीर धीरे चमड़े पर चट्टे पड़ने लगते है; यहाँ तक कि सारे शरीर में घाव हो जाते हैं, फफोले पड़ जाते हैं, रग, पट्टे और हडिङयाँ तक खराब हो जाती हैं । कभी कभी तालू चटक जाता है । क्रि॰ प्र॰—निकलना ।—फूटना । ।—होना ।