गाजर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

गाजर संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] एक पौधे का नाम जिसकी पत्तियाँ धनिए की पित्तियों से मिलती जुलती, पर उससे बहुत बड़ी होती हैं । विशेष—इसकी जड़ मूली की तरह, पर अधिक मोटी और कालिमा लिए भंटे की तरह गहरे लाल रंग की होती है । पीले रंग की भी गाजर होती है । यह खाने में बहुत मीठी होती है । यह गरम होती है और घोड़े की बहुत खिलाई जाती है । छोटी और नरम जड़ों को गरीब लोग और बच्चे बड़े चाव से खाते हैं । इसकी जड़ को सुखाकर उसके आटे का हलुआ बनाया जाता है जो पुष्ट माना जाता है । काछी लोग इसे अपने खेतों में कातिक अगहन में बोते हैं । इसकी तरकारी, अचार और मुरव्बे भी बनाए जाते हैं । मुहा॰—गाजर मूली समझना = तुच्छ समझना ।