गुड़

विक्षनरी से
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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

गुड़ संज्ञा पुं॰ [सं॰] कड़ाह में गाढ़ा पकाकर जमाया हुआ ऊख का रस जो कतरे, बट्टी या भेली के रूप में होता है । विशेष—खजूर के फलों के रस का भी गुड़ बनता है । यौ॰—गुड़ भरा हँसिया = असमंजस का काम जिसे न तो करते बने और न तो छोड़ते ही । ऐसा काम जिसे करने से भी जी हिचकता है और छोड़ने को भी जी नहीं चाहता । गूँगे का गुड़ = दे॰ 'गूँगा' का मुहा॰ । मुहा॰—कुल्हिया में गुड़ फुटना = (१) गुप्त रीति से कोई कार्य होना । छिपे छिपे कोई सलाह होना । (२) गुप्त रीति से कोई पाप होना । गुड़ गोबर करना = बिगड़ना । खराब करना । गुड़ गोबर होना = बिगड़ जाना । खराब हो जाना । जो गुड़ खाएगा सो कान छेदावेगा = जो कुछ धन लेगा उसे कष्ट भी उठाना होगा । विशेष—लड़कों का कान छेदते समय प्रायः रीति है कि लड़कों के हाथ में कुछ मिठाई दे देते हैं जिससे वे उसी में भूले रहें और झट से कान छेद दिए जायँ । गुड़ खाएगी अँधेरे में आएगी = जो कुछ लाभ उठावेगा उसे समय पर काम देना ही पड़ेगा । गुड़ खिलाकर ढेला मारना = कुछ लालच देकर फिर ऐसा बरताव करना जिससे कुछ प्राप्त न हो, उलटा कष्ट उठाना पड़े । गुड़ दिए मरे तो जहर क्यों दे = जब कोमल व्यवहार से काम निकले तो कड़ाई करने की क्या आवश्यकता । जब सीधे से काम चले तब जोई उग्र उपाय क्यों करे । गुड खाना गुलगुलों से घिनाना या परहेज करना = कोई बड़ी बुराई करना और छोटी बुराई से बचना । किसी कार्य का बड़ा अंश करना और छोटे से दूर रहना । गुड़ होगा तो मक्खियाँ बहुत आ जाएँगी = पास में धन होगा तो खानेवाले बहुत आ जायँगे । जब गुड़ गजन सहे तब मिसरी नग्म धराए = कष्ट पाने के बाद ही भाग्योदय होता है । उ॰— 'अरे भाई' ! यह सब महतमा जी का परताप है । कौन सह सकता है ? जब गुड़ गंजन सहे तो मिसरी नाम धराए ।— मैला॰, पृ॰ ३१ ।