घर

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संज्ञा

निवास का स्थान

पर्यायवाची

ग्रह

अनुवाद

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

घर संज्ञा पुं॰ [सं॰ गृह प्रा॰ हर > घर] [वि॰ घराऊ घरू, घरेलू]

१. मनुष्यों के रहने का स्थान जी दीवार आदि से घेरकर बनाया जाता है । निवासस्थान । आवास । मकान । यौ॰—घरकत्ती । घरघालन । घरघुसना । घरजमाई । घरजोत । घरदासी । घरद्वार । घरफोरी घरबसा । घरवसी । घरबार । घरबैसी । मुहा॰—अपना घर समझना =आराम की जगह समझना । संकोच का स्थान न समझना ऐसा स्थान समझना जहाँ घर का सा व्यवहार हो । जैसे,—इसे आप अपना घर समझिए, जो जरूरत हो, माँग लीजिए । घर आबाद होना = दे॰ 'घर बसना' । घर उठना = घर बनना । घर उजड़ना = (१) परिवार की दशा बिगड़ना । कूल की समृद्धि नष्ट होना । घर पर तबाही आना । घर की संपत्ति नष्ट होना । (२) परिवार पर विपत्ति आना । घर के प्राणियों का तितर बितर होना या मर जाना । घर करना = (१) बसना । रहना । निवास करना । घर बनाना । जैसे,—उन्होंने अब जंगल में अपना घर किया है । (२) किसी पस्तु का जमने या ठहरने के लिये जगह बनाना । समाने या अँटने के लिये स्थान निकालना । जैसे,—पैर ने जूते में अभी घर नहीं किया है; इसी से जूता कसा मालुम होता है । (३) किसी वस्तु का जमने या ठहरने के लिये गड्ढा करना । घुसना । धँसना । बिल बनाना । छेद करना । जैसे—(क) फोड़े पर जो पट्टी रखी है, वह चार दिन में घर करके सब मवाद निकाल देगी । (ख) कीड़े काठ में घर करते हैं । (४) घर का प्रबंध करना । घर सँभालना । किफायत से चलना । जैसे,—अब तुम बड़े हुए, घर करना सीखो । (स्त्री का) घर करना = पत्नी भाव से किसी के घर में रहना । खसम करना । आँख में घर करना = (१) इतना पसंद आना कि उसका ध्यान सदा बना रहे । जँचना । (२) प्रिय होना । पेरमपात्र होना । चित्त, मन या हृदय में घर करना = इतना पसंद आना कि उसका ध्यान सदा बना रहे । जँचना । अत्यंत प्रिय होना । प्रेमपात्र होना । दीआ घर करना = दीपक बुझाना । घर का = (१) निज का । अपना । जैसे—घर का मकान, घर का पैसा, घर का बगीचा । (२) आपस का । पराए का नहीं । संबंधियों या आत्मीय जनों के बीच का । जैसे,—(क) घर का मामला, घर की बात, घर का वास्ता । (ख) उनका हमारा तो घर मामला है । (३)अपने परिवार या कुटुंब का प्राणी । संबंधी । भाई बंधु । सुहृद् । उ॰— तीन बुलाए तेरह आए, नए गाँव की रीत । बाहरवाले खा गए घर के गावें गीत ।—लोकोक्ति । (४) पति । स्वामी । भर्त्तार । उ॰—घर के हमारे परदेश को सिधारे यातें दया करि बूझी हम रीति राहवारे की ।—कविंद (शब्द॰) । घर का अच्छा = समृद्ध कुल का । अच्छे खानदान का । खाने पीने से खुश । घर का आदमी—अपने कुटुंब का प्राणी । भाई बंधु । इष्ट मित्र । जैसे आप दो घर के आदमी हैं; आपसे छिपाना क्या ? घर का आँगन हो जाना = (१) घर खँडहर हो जाना । घर उजड़ जाना । घर पर तबाही आना । (२) स्त्री को बच्चा होना । घर में संतान उत्पन्न होना । घर का उजाला = (१) कुलदीपक । कुल की समृद्धि करनेवाला । कुल की कीर्ति बढ़ानेवाला । भाग्यवान् । (२) वह जिसे देखकर घर के सब प्राणी प्रफुल्लित हों । अत्यंत प्रिय । लाडला । बहुत प्यारा । (३) बहुत सुंदर । रूपवान् । घर का चिराग = दे॰ 'घर का उजाला' । घर का चिराग गुल होना = (१) घर का सर्वनाश हो जाना । (२) इकलौते पुत्र का मर जाना । जैसे—उनके घर का चिराग ही गुल हो गया ।—फिसाना॰, भा॰ ३, पृ॰ ५८० । घरवा या घरौना करना = घर उजाड़ना । घर सत्यानाश करना । घर का बोझ उठाना या सँभालना = घर का प्रबंध करना । गृहस्थी का कामकाज देखना । घर का भेदिया या भेदी = घर का सब भेद जाननेवाला । ऐसा निकटस्थ मनुष्य जो सब रहस्य जानता हो । जैसे—घर का (भेदी) भेदिया लंका दाह । घर का भोला = अपने परिवार में सबसे मूर्ख । बिलकुल सीधा सादा । जैसे—वह ऐसा ही तो घर का भोला है जो इतने में ही तुम्हें दे देगा । घर का काट खाना या काटने दौड़ना = घर में रहना अच्छा न लगना । घर में जी न लगना । घर उजाड़ और भयानक लगना । घर में उदासी छाना । विशेष—जब घर का गोई प्राणि कहीं चला जाता है या मर जाता है, तब ऐसा बैलते हैं । घर का न घाट का = (१) जिसके रहने का कोई निश्चित स्थान न हो । (२) निकम्मा । बेकाम । घर का हिसाब = (१) अपने लेन देन का लेखा । निज का लेखा । (२) अपने इच्छानुसार किया हुआ हिसाब । मनमाना लेखा । घर का रास्ता =सीधा या सहज काम । जैसे—इस काम को घर का रास्ता न समझना । घर का मर्द, शेर, वीर या बहादुर = अपने ही खर में बल दिखाने वा बढ़ बढ़करे बोलने— वाला । परोक्ष में शेखी बघारनेवाला और मुकाबिले के लिये सामने न आनेवाला । घर (घरहिं या घर ही ) के बाढ़े=घर ही में बढ़ बढ़कर बात करनेवाला । बाहर कुछ पुरुषार्थ न दिखानेवाला । पीठ पीछे शेखी बघारनेवाला । सामने न आने वाला । उ॰—(क) मिले न कबहुँ सुभट रन गाढ़े । द्विज देवता घरहिं के बाढ़े । तुलसी (शब्द॰) । (ख) ग्वालिनि हैं घर ही की बाढ़ी । निसि अरु दिन प्रति देखति हौं, आपनैं ही आँगन ढाढ़ी ।—सूर॰, १० ।७७४ । घर का नाम उछालना या डुबोना = कुल को कलंकित करना । अपने भ्रष्ट और निष्कृष्ट आचरण से अपने परिवार की प्रतिष्ठा खोना । घर की = घरवाली । गृहिणी । स्त्री । घर की बात = (१) कुल से संबंध रखनेवाली बात । (२) आपस की बात । आत्मीय जनों के बीच की बात । घर की पूँजी = अपने पास की संपत्ति । निज का धन । घर की तरह बैठना = प्राराम से बैठना । खूब फैलकर बैठना । बैठने में किसी प्रकार का संकोच न करना । घर की तरह बैठो= सिमट कर बैठो । ऐसा बैठो कि औरों के लिये भी बैठने की जगह रहे । घर की तरह रहना = आराम से रहना । अपना घर समझकर रहना । घर की खेती = अपनी ही वस्तु । अपने यहाँ होने या मिलने वाली चीज । जैसे—इसके लिये क्या बात है । यह तो घर की खेती है, जितनी कहिए उतनी भेज दें । घर की मुर्घी साग बराबर = घर की अच्छी वस्तु की भी इज्जत नहीं होती है । घर के घर =(१) भीतर ही भीतर । गुप्त रीति से । बिना और लोगों को सुचना दिए । जैसे—तुमने तो घर के घर सौदा कर लिया, हमें बतलाया तक नहीं । (२) बहुत से घर । जैसे,—हैजे में घर साफ हो गए । घर के घर रहना = किसी व्यवसाय में न हानि उठाना न लाभ । बराबर रहना । जैसे,—इस सौदे में हम घर के घर रहे । घर से घर बंद होना = बहुत से घरों का उजड़ जाना । बहुत से घरों के रहनेवालों का मर जाना या कहीं चला जाना । घर खोज मिटा = जिसके घर का चिह्न तक न रह जाय । जिसका कुछ क्षय हो जाय । नष्ट । निगोड़ा—(स्त्रियों का अभिशाप या गाली) । घर खोना =वर सत्यानाश करना । घर उजाड़ना । घर की संपत्ति नष्ट करना । उ॰—चूकते ही चुकते तो सब गया । चूककर खोना न अब घर चाहिए ।—चुभते॰, पृ॰ ३८ । घर गई = घर उजड़ी । निगोड़ी ।—(स्त्रीयों का अभिशाप या गाली) । घर घर = हर एक घर में । सबके यहाँ । जैसे,—घर घर यही हाल है । घर घर के हो जाना = तितर बितर हो जाना । इधर उधर हो जाना । मारे मारे फिरना । बेठिकाने हो जना । उ॰—तेरे मारे यातुधान भए घर घर के ।—तुलसी (शब्द॰) । घर घलना = (१) घर बिगड़ना । घर उजड़ना । परिवार की बुरी दशा होना । (२) कुल में कलंक लगना । उ॰—कहे ही बीना घर केते घले जू ।—देव (शब्द॰) । घर घाट = (१) रंग ढंग । चाल ढाल । गति और अवस्था । जैसे,—पहले उनका घर घाट देख लो, तब कुछ करो । (२) ढंग । ढब । प्रकृति । जैसे,—वह और ही घर घाट का आदमी है । (३) ठौर ठिकाना । घर द्वार । स्थिति । जैसे—घर घाट देखकर संबंध किया जाता है । घर घाट मालूम होना = रंग ढंग मालूम होना । सारी अवस्था विदित होना । कोई बात छिपी न रहना । घर घालना =(१) घर बिगाड़ना । परिवार मे अशांति या दु:ख फैलाना । परिवार को हानि पहुंचाना । जैसे,—इस जूए ने जाने कितने घर घाले हैं । (२) कुल को दूषित करना । कुल की मर्यादा भ्रष्ट करना । कुल में कलंक लगना । जैसे,—इस कुटनी ने न जाने कितने घर घाले हैं । (३) लोगों को मोहित करके वश में करना । प्रेम से व्यथित करना । जैसे—अभी इसे सयानी तो होने दो, न जाने कितने घर घालेगी ।—(बाजारू) । घरघुसना = घर में घुसा रहनेवाला । हर घड़ी अंत:पुर में पड़ा रहनेवाला । सदा स्त्रीयों के बिच में बैठा रहनेवाला । बाहर निकलकर काम काज न करनेवाला । घर चढ़कर लडने आना = लड़ाई करने के लिये किसी के घर पर जाना । घर चलना = गृहस्थी का निर्वाह होना । घर का खर्च बर्च चलना । घर चलाना = गृहस्थी का निर्वाह करना । घर डुबोना = (१) घर की संपत्ति रष्ट करना । घर तबाह करना । (२) कुल में कलंक लगाना । घर डूबना = (१) घर तबाह होना । (२) कुल में कलंक लगना । घर जमना = गृहस्थी ठीक होना । घर का समान इकट्ठा होना । घर जाना = घर का बिगड़ ना । कुल का नाश होना । घरत जुगु = गृहस्थी का प्रबंध । घर झँकनी = एक घर से दूसरे घर घूमनेवाली । अपने घर न बैठनेवाली । घर तक पहुँचना = माँ बहन की गाली देना । बाप दादों तक चढ़ जाना । बाप दादे बखानना । घर घाम में छवाना = (१) कष्ट देना । (२) धमकी देना । घर तक पहुँचना = (१) समाप्तितक पहुँचाना । ठिकाने तक ले जाना । संपूर्ण करना । पूरा उतारना । जैसे ,—जिस काम को उठाओ, उसे घर तक पहुँचाओ । (२) बुद्धि ठिकाने ले आना । बात को ठीक ठीक समझा देना । कायल करना । जैसे,—झूठे को घर तक पहुँचा दिया । घर दामाद लेना = दामाद को अपने घर रखना । घर देखना = किसी के घर कुछ माँगने जाना । जैसे, यहाँ कुछ न मिलेगा दूसरा घर देखो । घर देखना, देख लेना या पाना = रास्ता देखलेना । परचजाना । ढर्रा निकाल लेना जैसे,—(क) तुम और किसी से तो कुछ माँगते नहीं; सीधा हमारा घरदेख पाया है । (ख) बुढ़िया के मरने का सोच नहीं, यम के घर देख लेने का सोच है । किसी के घर पड़ना = किसी के घर में पत्नी भाव से जाना । (किसी वस्तु का) घर पड़ना= घर में आना । प्राप्त होना । मिलना । मोल मिलना । जैसे,—यह चीज क्या भाव घर पड़ी ? घर पर गंगा आना = बिना परिश्रम के कार्य पूरा हो जाना । उ॰—आलसी घर गगा आई मिटि गई गर्मी भई सियराई ।—कबीर सा॰, पृ॰ ५४५ । घर पीछे = एक एक घर में । एक एक घर से । जैसे,—घर पीछे एक रुपया वसूल करो । घर फटना = (१) मकान की दीवार आदि में दरार पड़ना । (२) घर में बच्चा उत्पन्न होना । (३) छाती फटना । बुरा लगना । असह्वा होना । न भाना । जैसे,—लेने को तो रुपया ले लिया, अब देते हुए क्यों घर फटना है ? (४) घर में बिगाड़ होना । घरफूँक तमाशा या मामला = घर का सत्यानाश करने वाली बात । ऐसी बात जिससे घर की संपत्ति नष्ट हो । घर पर तबाही लानेवाली चाल ढाल । घर फूँक तमाशा देखना = घर की संपत्ति लष्ट करके अपना मनोरंजन करना । अपनी हानि करके मौज उडना । जैसे,—रोजोशब यही चरचे यही कहकहे, यही चहचहे घर फूँक तमाशा देखा ।—फिसाना॰, भा॰ २, पृ॰ ६ । घर फोड़ना = घर में विग्रह उत्पन्न करना । परिवार में झगड़ा लगाना । परिवार में उपद्रव खड़ा करना । घर बंद होना = (१) घर में ताला लगना ।(२) घर में प्राणी न रह जाना । घर का कोई मालिक न रहना । घर के प्राणियों का तितर बितर होना । (३) किसी घर से कोई संबंध न रह जाना । घर बिगाड़ना = (१) घर उजाड़ना । घर सी समृद्धि नष्ट करना । घर तबाह करना । परिवार की हानि करना । (२) घर में फूट फैलाना । घर में झगड़ा खड़ा करना । घर के प्राणियों में परस्पर लड़ाई कराना । (३) कुलवती को बहकाना । घर की बहू बेटी को बुरे मार्ग पर ले जाना । घर बनना = (१) मकान तैयार होना । (२) घर की आर्थिक स्थिति अच्छी होना । घर संपन्न होना । घर भरा पूरा होना । घर बनाना = (१) मकान तैयार करना । (२) निवासस्थान करना । जमकर रहना । बसना । (३) घर भरना । घर को धनधान्य मे पूर्ण करना । घर की आर्थिक दशा सुधारना । अपना लाभ करना । जैसे,—नौकरों पर कोई आँख रखनेवाला नहीं है, वे अपना घर बना रहे हैं । घर बरबाद होना= घर बिगड़ना । घर की समृद्धि नष्ट होना । परिवार की दशा बिगड़ना । घर बसना = (१) घर आबाद होना । घर में प्राणियों का होना । (२) घर की दशा सुधरना । घर में धनधान्य होना । (३) घर में स्त्री या बहू आना । ब्याह होना । (४) दुलहा दुलहिन का समागम होना । घर बसाना = (१) घर आबाद करना । घर में नए प्राणी लाना । (२) घर की दशा सुधारना । घर को धनधान्य से पूरित करना । (३) घर में स्त्री या बहू लाना । विवाह करना । घर बेचिराग हो जाना = नामलेवा न रह जाना । एकलौते बेटे का मर जाना । घर बैठना = (१) घर में बैठना । एकांत सेवन करना । (२) काम पर न जाना । काम छोड़ना । नौकरी छोड़ना । जैसे,—(क) वह चार दिन कोई काम करता है, फिर घर बैठ रहता है । (ख) तुमसे काम नहीं होता, तुम घर बैठो । (३) कोई काम न मिनला । बेकार रहना । बेरोजगार रहना । जीविका न रहना । जैसे,—आजकल वह घर बैठा है; उसे कोई काम दिलओ । अधिक वर्षा से मकान का गिरना । जैसे,—लगातार बारह घंटे पानी बरसने से कई घर बैठ गए । (किसी स्त्री का किसी पुरुष के)घर बैठना= किसी के घर पत्नी भाव से चली जाना । किसी को खसम बनाना । घर बैठे रोटी = बिना मेहनत की रोटी । बिना परिश्रम की जीविका । घर बैठे = (१) बिना कुछ काम किए । बिना हाथ पैर डुलाए । बिना परिश्रम । जैसे,— घर बैठे १०० रुपया महीना मिलता है, कम है ? (२) बिना कहीं गए आए । बिना कुछ देखे भाले । बिना बाहर जाकर सब बातों का पता लगाए । विना देश काल की अवस्था जाने । जैसे,—घर बैठे बातें करते हो, बाहर जाकर देखो तो जान पड़े । (३) बिना कहीं गए आए । एक ही स्थान पर रहते हुए । बिना यात्रा आदि का कष्ट उठाए । जैसे,—इस पुस्तक को पढ़ो और घर बैठे देश देशांतरों का वृत्तांत जानो । घर बैठे की नौकरी = बिना परिश्रम की नौकरी । घर बैठे बैर दौड़ाना = मंत्र के बल से अपने पास किसी वस्तु या व्यक्ति को बुला लेना । मोहन करना । मूठ चलाना । घर भर = घर के सव प्राणी । सारा परिवार । जैसे,—घर भर यहाँ आया है । घर भरना = (१) घर को धनधान्य से पूर्ण करना । घर में धन इकट्ठा करना । अपना लाभ करना । माल अपने घर में रखना । (२) (अकर्मक प्रयोग) घाटा परा होना । हानि की पूर्ति होना । (३) घर का प्राणियों से भरना । घर मे मेहमानों और कुटुंबवालों का इकट्ठा होना । घर में = स्त्री । जोरू । घरवाली । जैसे,— उनके घर में बीमार हैं ।—(बोल॰) । घर भाँय भाँय करना = घर का सूनापन खलना । सूनेपन के कारण घर का डरावना लगना । कुछ घर में आना = अपना लाभ होना । प्राप्ति होना । जैसे,—उनकी नौकरी जाने से घर में क्या आ जायग । (किसी स्त्री को) घर में डालना = रख लेना । रखेली बनाना । जोरू बनाना । (किसी स्त्री का) घर में पड़ना = किसी के घर पत्नी भाव से जाना । किसी की घरवाली होना । घर सिर पर उठा लेना = बहुत अधिक शोर करना । ऊधम मचाना । घरसे = (१) पास से । पल्ले से जैसे—तुम्हारे घर से क्या गया । (२) पति । स्वामी । (३) स्त्री । पत्नी ।—(बोल॰) । घर से पाँव निकालना = इधर उधर बहुत घूमना । शासन में न रहना । स्वेच्छाचार करना । मर्यादा के बाह चलना । जैसे,—तुमने बहुत घर से पाँव निकाले हैं; में अभी जाकर कहता हूँ । घर से बाहर पाँव निकालना= वित्त से बाहर काम करना । कमाई से अधिक खर्च करना । घर से देना = (१) अपने पास से देना । अपनी गाँठ से देना । जैसे—जब वह तुम्हारा रुपया देता ही नहीं है तब क्या मैं तुम्हें अपने घर से दूँगा ? (२) अपना रुपया खोना । स्वयं हानि उठाना । जैसे तुम इनकी जमानत न करो, नहीं तो घर से देना होगा । घर सेना = (१) घर में पड़े रहना । बाहल न निकलना । (२) बेकार बैठे रहना । इधर उधर काम धंधे के लिये न जाना । घर होना =(१) गृहस्थी चलना । निबाह होना । घर का काम चलना । जैसे,—ऐसे करतबों से कहीं घर होता है ? (२) घर के प्राणियों में मेलजोल होना । घर में सुख शांति होना । स्त्री पुरुष में बनना ।

२. जन्मस्थान । जन्मभूमी । स्वदेश ।

३. घराना । कुल । वंश । खानदान । जैसे,—किसी अच्छे या बड़े घर लड़की ब्याहेंगे । वह अच्छे घर का लड़का है । उ॰—जो घर बर कूल होय अनूपा । करिय विवाह सुता अनुरूपा ।—तुलसी (शब्द॰) ।

४. कार्यालय । कारखाना । आफिस । दफ्तर । जैसे,—डाकघर, तारघर, पुतलीघर, रेलघर, बंकघर इत्यादि ।

५. कोठरी । कमरा । जैसे,—ऊपर के खंड में केवल चार घर हैं ।

६. आड़ी खड़ी खिंची हुई रेखाओं से घिरा स्थान । कोठा । खाना । जैसे,—कुंडली या यंत्र का घर ।

७. शतरंज आदि का चौकोर खाना । कोठा । मुहा॰—घर बंद होना = गोटी शतरंज के मुहरे आदि चलने का रास्ता न रहना ।

८. कोई वस्तु रखने का डिब्बा या चोंगा । कोश । खाना । केस । जैसे, —चशमें का घर, तलवार का घर ।

९. पटरी आदि से घिरा हुआ स्थान । खाना । कोठा । जैसे, —आलमारी के घर, संदूक के घर ।

१०. ग्रहों की राशि ।

११. किसी वस्तु के अँटने या सामने का स्थान । छोटा गड्ढा । जैसे, —पानी ने स्थान स्थान पर घर लिया है । क्रि॰ प्र॰—करना ।

१२. किसी वस्तु (नगीना आदि) को जमाने या बैठाने का स्थान । जैसे, —नगीने का घर ।

१३. छेद । बिल । सूराख । जैसे, —छलनी के घर । बटन के घर । मुहा॰—घर भरना = छेद मूँदना । बिल बंद करना ।

१४. राग का स्थान । मुकाम । स्वर । जैसे,—यह चिड़िया कई घर बोलती है । मुहा॰—घर में कहना = (१) ठीक ठीक स्वर ग्राम के साथ गाना । घर से कहना = (२) ठीक ठीक स्वर के साथ गाना । (२) चिड़ियों का अच्छी बोली बोलना । कोकिल आदि का मधुर स्वर से बोलना ।

१५. उत्पत्ति स्थान । मूल कारण । उत्पन्न करनेवाला । जैसे,— (क) रोग का घर खाँसी । (ख) खीरा रोग का घर है ।

१६. गृहस्थी । घरबार । जैसे,—घर देखकर चलो ।

१७. घर का असबाब । गृहस्थी का सामान । जैसे,—वह अपना इधर उधर घूमता है; मै घर लिए बैठी रहती हूँ ।—(स्त्री॰) ।

१८. भग या गुगेंद्रियों । —(बादारू) । क्रि॰ प्र॰—चिरना ।—फटना ।

१९. चोट मारने का स्थान । वार करने का स्थान या अवसर । मुहा॰—घर खाली छोड़ना या देना = वार न करना । वार चूक जाना ।

२०. आँख का गोलक या गड्ढा ।

२१. चौखटा । फ्रेम । जैसे,— तसवीर का घर ।

२२. वह स्थान जहाँ कोई वस्तु बहुतायत से हो । भांडार । खजाना । जैसे,—काश्मीर मेवों का घर है ।

२३. दाँव । पेंच । युक्ति । जैसे,—वह कुश्ती के सब घर जानता है ।

२४. केले, मूँज या बाँस का समूह जो एकत्र घने होकर उगते हैं । यौ॰—घर घाट = दाँव पेंच ।

घर घराना ^१ क्रि॰ अ॰ [अनुध्व॰] घर्र घर्र शब्द करना । कफ के कारण गले से साँस लेते समय शब्द निकलना ।

घर घराना ^२ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ घर + घराना] कुल परिवार । वंश । जैसे,—अंधा बाँटे शीरनी घर घराने खाँय ।