घाम

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

घाम † संज्ञा पुं॰ [सं॰ घर्म, प्रा॰ घम्म] धूप । सूर्यातप । उ॰—घाम घरीक निवारिये कलित ललित अलिपुंज । जमुना तीर तमाल तरु निखति मालती कुंज ।—बिहारी (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰—चढ़ना ।—निकलना ।—लगना ।—होना । मुहा॰—घाम खाना = (१) गरमी के लिये धूप में रहना । (२) ऐसे स्थान पर रहना जहाँ धूप या सुर्य की गरमी का प्रभाव पड़े । घाम लगना = लू लगना । घर घाम में छाना = आफत में डालना । विपत्ति में डालना । घर में घाम आना = बड़ी कठिनता का सामना होना । बड़ी मुसीबत होना । जैसे,—इस काम को करना सहज नहीं है, घर में घाम आ जायगा ।