चक्की

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

चक्की ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ चक्रिका, प्रा॰ चक्की] नीचे ऊपर रखे हुए पत्थर के दो गोल और भारी पहियों का बना हुआ यंत्र जिसमें आटा पीसा जाता है या दाना दला जाता है । आटा पीसने या दाल दलने का यंत्र । जाँता । यौ॰—पनचक्की । क्रि॰ प्र॰—चलना । चलाना । यौ॰—चक्की का पाट = चक्की का एक पत्थर । चक्की की मानी = (१) चक्की के नीचे के पाट के बीच में गड़ी हुई वह खूँटी जिसपर ऊपर का पाट घूमता है । (२) ध्रुव । ध्रुवतारा । मुहा॰—चक्की छूना = (१) चक्की में हाथ लगाना । चक्की चलाना आरंभ करना । चक्की चलाना । (२) अपना चरखा शुरू करना । अपना वृत्तांत आरंभ करना । अपनी कथा छेड़ना । आपबीती सुनाना । चक्की पीसना = (१) चक्की में डालकर गेहूँ आदि पीसना । चक्की चलाना । (२) कड़ा परिश्रम करना । बड़ा कष्ट उठाना । चक्की रहाना = चक्की को टाँकी से खोद खोदकर खुरदरा करना जिसमें दाना अच्छी तरह पिसे । चक्की कूटना ।

चक्की ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ चक्रिका]

१. पैर के घुटने की गोल हड्डी ।

२. ऊँटों के शरीर का गोल घट्टा । पृ †

३. बिजली । वज्र ।

चक्की ^३ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ चक्र] दे॰ 'चकई' । उ॰— हंस मानसर तज्यो चक्क चक्की न मिले अति ।—अकबीर॰, पृ॰ ११८ ।