चक्रवृद्धि

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

चक्रवृद्धि संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] एक प्रकार का सूद या ब्याज जिसमें उत्तरोत्तर ब्याज पर भी व्याज लगता जाता है । सूद दर सूद । विशेष—मनु ने इसे अत्यंत निंदनीय ठहराया है ।

२. गाडी़ आदि का भाडा़ ।