चतुर्मुख

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

चतुर्मुख ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. एक प्रकार का चौताला ताल जिसमें क्रम से एक लघु (लघु की एक मात्रा), एक गुरु (गुरु की दो मात्राएँ),एक लघु (लघु की एक मात्रा) और एक प्लुत (प्लुत की तीन) मात्रा होती है । इसका बोल यह है—तांह । तकि तकि तांह/?/थकि थरि । तकि तकि दिधि गन थोंड़े ।

२. नृत्य में एक प्रकार की चेष्टा ।

३. विष्णु ।

चतुर्मुख ^२ वि॰ [स्त्री॰ चतुर्मुखी] जिसके चार मुख हों । चार मुँहवाला ।

चतुर्मुख ^३ क्रि॰ वि॰ चारों ओर ।