चमेली

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

चमेली संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ चम्पकवेलि (यद्यपि वैद्यक निघंटु में 'चमेली' शब्द आया है, तथापि वह संस्कृत नहीं प्रतीत होता)]

१. झाड़ी या लता जो अपने सुगंधघित फूलों के लिये प्रसिद्ध है । विशेष—इसमें लंबी पतली टहनियाँ निकलती हैं, जिनके दोनों ओर पतली सींकों में लगी हुई छोटी छोटी पत्तियाँ होती हैं । चमेली दो प्रकार की होती है । एक साधारण चमेली जिसमें सफेद रंग के फूल लगते हैं और दूसरी जर्द चमेली जिसमें पीले रंग के फूल लगते हैं । फूलों की महक बड़ी मीठी होती है । चमेली के फूलों से बासा जाता है जो चमेली का तेल कहलाता है । यौ॰—चमेली का जाल = एक तरह का कसीदा ।

२. मल्लाहों की बोली में पानी की वह थपेड़ जो ऊँची लहर उठने के कारण दोनों ओर लगती है और जिसके कारण प्रायः नावें डूब जाती हैं ।