चलना

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हिन्दी[सम्पादन]

क्रिया[सम्पादन]

चलना

अनुवाद[सम्पादन]


प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

चलना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ चलन]

१. एक स्थान से दूसरे स्थान को जाना । गमन करना । प्रस्थान करना । विशेष—यद्यपि 'जाना' और 'चलना' दोनों क्रियाएँ कभी कभी समान अर्थ में प्रयुक्त होती हैं. तथापि दोनों के भावों में कुछ अंतर है । 'जाना' क्रिया में स्थान की ओर विशेष लक्ष्य रहता है, पर 'चलना' में गति की ओर विशेष लक्ष्य रहता है । जैसे,—चलती गाड़ी पर सावार होना ठीक नहीं है । चलना क्रिया से भूतकाल में भी क्रिया की समाप्ति अर्थात् किसी स्थान पर पहुँचने का बोध नहीं होगा । जैसे,—वह दिल्ली चला । पर जाना' से भूतकाल में पहुँचने का बोध हो सकता है । जैसे,— 'वह गाँव में गया' । वक्ता अपने साथ प्रस्थान करने के संबं ध में जब किसी से प्रशन या अनुरोध करेगा, तब वह 'चलना' क्रिय़ा का प्रयोग करेगा, 'जाना' का नहीं । जैसे—(क) तुम मेरे साथ चलोगे ? (ख) अब यहाँ से चलो ।

२. गति में होना । हिलना डोलना । हरकत करना । जैसे— नाड़ी चलना, कल चलना, पुरजा चलना, घड़ी चलना । संयो॰ क्रि॰—जाना ।—पड़ना । मुहा॰—किसो का चलना=किसी का काम चलना । गुजर होना । निर्वाह होना । जैसे,—इतने में हमारा नहीं चल सकता । पेट चलना=(१)दस्त आना । (२) निर्वाह होना । गुजर होना । जैसे—इतने में पेट कैसे चलोगा ? मन चलना या दिन चलना=इच्छा होना । लालसा होना । किसी वस्तु के लिये चित्त चंचल होना । प्राप्ति की इच्छा होना । जैसे,— (क) जिस किसी की चीज हुई, उसी पर तुम्हारा मन चल जाता है । (ख) उसका मन पराई स्त्री पर कभी नहीं चलता । मुँह चलना= (१) खाते समय मुँह का हिलना । खाया जाना । भक्षण होना । जैसे,—जब देखो, तव उसका मुँह चलता रहता है । (२) मुँह से बकवाद या अनुचित शब्द निकालना । जैसे,—तुम्हारा मुँह बहुत चलता है, तुमसे चुप नहीं रहा जाता । (३) कै होना । वमन होना । जैसे,—उसका मुँह चल रहा है, कोई चीज पेट में ठहरती नहीं । मुँह पेट चलना=कै दस्त होना । हाथ चलना=(१) मारने के लिये हाथ उठाना । (२) मारना । जैसे,—उसके ऊपर जब देखो तब तुम्हारा हाथ चलता है । चल बसना= मर जाना । अपने चलते=भरसक । यथाशक्ति । उ॰—(क) अपने चलत न आजु लगि अनभल काहु क कीन्ह ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) अपने चलते तो हम ऐसा कभी न होने देंगे । इसके चलते=इस बात के होते हुए । इसके कारण ।

३. कार्यनिर्वाह में समर्थ होना । निभना । जैसे,—यह लड़का इस दरजे में चल जायगा । मुहा॰—चल निकलना=किसी कार्य में उन्नाति करना । किसी विषय में क्रमश: आगे बढ़ना । जैसे,—उन्हें काम सीखते थोड़े ही दिन हुए; पर वे चल निकले हैं ।

४. प्रवाहित होना । बहना । जैसे,—मोरी चलना, हवा चलना ।

५. वृद्दि पर होना । बाढ़ पर होना । जैसे,—अब यह पौधा भी चला ।

६. किसी कार्य में अग्रसर होना । किसी कार्य का आगे बढ़ना । किसी युक्ति का काम में आना । जैसे—सब उपाय करके तो तुम हार गए: अब कोई और तरकीब चलो ।

७. आरंभ होना । छिड़ना । जैसे,—बात चलना, जिक्र चलना, चर्चा चलना ।

८. जारी रहना । क्रम या परंपरा का निवर्हि होना । जैसे,—(क) वंश चलना, नाम चलना । (ख) जब तक रामचरितमानस रहेगा, तब तक तुलसीदास जी का नाम चला जायगा ।

९. खाने पीने की वस्तु का परोसा जाना । खाने के लिये रखा जाना । जैसे—इसके बाद अब मिठाई चलेगी । १०, बराबर काम देना । टिकना । ठहरना । खटाना ।जैसे,— यह जूता कुछ भी न चला ।

११. व्यवहार में आना । लेन देन के काम में आना । जैसे,—यह रुपया यहाँ नहीं चलेगा ।

१२. प्रचलित होना । प्रचार पाना । जारी होना । रवाज पाना । जैसे—रिति चलना, चाल चलना । (ख) कुछ दिनों तक गोल टोपी खूब चली, पर अब उसकी चाल उठती जाती है । उ॰— रघुकुल रीति सदा चलि आई । प्रान जाई बरु बचन न जाई ।—तुलसी (शब्द॰) ।

१३. प्रयुक्त होना । व्यवह्रत होना । काम में लाया जाना । जैसे, तलवार चलना, फावड़ा चलना ।

१४. अच्छी तरह काम देना । उपयोग या व्यवहार में अनुकूल होना । जैसे—कलम चलती नहीं ।

१५. तीर गोली आदि का छूटना ।

१६. लड़ाई झगड़ा होना । विरोध होना । शत्रुता होना । जैसे,—आजकल उन दोनों में खूब चल रही है ।

१७. कि सी व्यवसाय की वृद्बि होना । किसी व्यापार का बढ़ना । काम चमकना । जैसे,—(क) यह दूकान खूब चली । (ख) कुछ दिनों तक लाख का काम खूब चला था । मुहा॰—चल निकलना=किसी काम का ढर्रे पर आना । किसी कार्य का निर्वाह होने लगना । किसी कार्य में सफलता होना । जैसे,—अब तो तुम्हारा रोजगार चल निकला ।

१८. पढ़ा जाना । बाँचा जाना । उचरना । जैसे,—यह लिखावट तो हमसे नहीं चलती ।

१९. कृतकार्य होना । सफल होना । प्रभाव करना । कारगर होना । उपाय लगना । वश चलना । जैसे,—(क) यहाँ तुम्हारी एक भी न चलेगी । (ख) उस पर जादू टोना कुछ नहीं चल सकता । मुहा॰—किसी की चलना= (किसी का) उपाय लगना । वश चलना । प्रयत्न सफल होना । उ॰—अग निरखि अनंग लज्जित सकै नहिं ठहराय । एक को कहा चलै शत शत कोटि रहत लजाय ।—सूर (शब्द॰) ।

२०. आचरण करना । व्यवहार करना । जैसे,—बड़ों के आज्ञा- नुसार चलने से कभी धोखा नहीं होता ।

२१. गले के नीचे उतरना । निगला जाना । खाया जाना । जैसे—अब बिना घी के एक कौर नहीं चलता ।

२२. थान में से कपड़ा उतारते समय कपड़े का बीच में मोटा सूत आदि पड़ जाने के कारण सीधा न फटना, कुछ इधर उधर हो जाना । (बजाज) । †

२३. बासी होना । सड़ना । जैसे,—सालन चल गया । दाल चल गई ।

२४. अटना । पूरा पड़ना ।—जैसे, राशन पाँच दिन और चलेगा ।

चलना ^२ क्रि॰ स॰ शतरंज या चौसर आदि खेलों में किसी मोहरे या गोटी आदि को अपने स्थान से बढ़ाना या हटाना, अथवा ताश या गंजीफे आदि खेलों में किसी पत्ते को खेल के कामों के लिये सब खेलनेवालों के सामने फेंकना । जैसे,—हाथी चलना, वजीर चलना दहला चलना, एक्का चलना आदि ।

चलना ^३ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ चलनी] बड़ी चलनी या छलनी ।

२. चलनी की तरह का लोहे का एक बड़ा कलछुला या डोई जिससे खँड़सार में उबलते हुए रस के ऊपर का फेन, मैल आदि साफ करते है ।

३. हलवाइयों का एक औजार जो छेददार डोई के समान होता है और जिससे शीरा या चाशनी इत्यादि साफ की जाती है । छन्ना ।