चाँदी

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

चाँदी संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ चाँद]

१. एक सफेद चमकीली धातु जो बहुत नरम होती है । इसके सिक्के, आभूषण और बरतन इत्यादि बनते हैं । विशेष—यह खानों में कभी शुद्ध रूप में कभी दूसरे खनिज पदार्थों में गंधक, संखिया सुरमे आदि के साथ मिली हुई पाई जाती है । इसका गुरुत्व सोने के गुरुत्व का आधा होता है । इसका अम्लक्षार बड़ी कठिनता से बनता है । चाँदी के अम्लक्षार को नौसादर के पानी में घोलकर सुखाने से ऐसा रासायनिक पदार्थ तैयार होता है, जो हलकी रगड़ से भी बहुत जोर से भड़कता है । वैद्य लेग इसे भस्म करके रसौषध बनाते हैं । हकीम लोग भी इसका वरक रोगियों को देते हैं । चाँदी का तार बहुत अच्छा खिंचता है जिससे कारचोबी के अनेक प्रकार के काम बनते हैं । चाँदी से कई एक ऐसे क्षार बनाए जाते हैं, जिनपर प्रकाश का प्रभाव बड़ा विलक्षण पड़ता है । इसी से उनका प्रयोग फोटोग्राफी में होता है । पर्या॰—रौप्य । रजत । चामीकर । यौ॰—चाँदी का जूता = वह धन जो किसी को अपने अनुकूल या वश में करने को दिया जाता है । जैसे,—घूस इनाम आदि । चाँदी का पहरा = सुख समृद्धि का समय । सौभाग्य की दशा । धनधान्य की पूर्णता की अवस्था । मुहा॰—चाँदी कर ड़ालना या देना = जला कर राख कर ड़ालना जैसे,—तुम तो तमाकू को चाँदी कर ड़ालते हो, तब दूसरे को देते हो । चाँदी काटना = (१) खूब रुपया पैदा करना । खूब माल मारना । (२) स्त्री से प्रथम समागम करना । सुंदर स्त्री से प्रथम समागम करना ।

२. धन की आय । आर्थिक लाभ । उ॰—आजकल तो उनकी चाँदी है ।

३. खोपड़ी का मध्य भाग । जाँद । चँदिया । मुहा॰—चाँदी खुलवाना = चाँद के ऊपर बाला मुड़ाना ।

४. एक प्रकार की मछली जो दो या तीन इंच लंबी होती है ।