छोर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

छोर संज्ञा पुं॰ [हिं॰ छोडना]

१. किसी वस्तु का वह किनारा जहाँ उसकी लंबाई का अंत होता हो । आयत विस्तार की सीमा । चौडाई का हाशिया । जैसे,—दुपट्टें का छोर, तागे का छोर । उ॰—काननि कनफूल उपवीत अनुकूल पियरे दुकूल विलसत आछे छोर हैं ।—तुलसी (शब्द॰) । यौ॰—और छोर = आदि अंत ।

२. विस्तार की सीमा । हद ।

३. किनारे पर सूक्ष्म भाग । नोक । कोर । कोना । उ॰—सिला छोर छुवत अहल्या भई दिव्य देह गुन पेशु पारस पंकरुह पाय के ।—तुलसी (शब्द॰) ।

छोर छुट्टी संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰] दे॰ 'छोड छुट्टी' ।